कानपुर , मई 15 -- कृषि, कृषि शिक्षा एवं कृषि अनुसंधान मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि प्राकृतिक खेती से प्रदेश की कृषि व्यवस्था अधिक समृद्ध और टिकाऊ बनेगी तथा खरीफ सीजन में दलहन और तिलहन फसलों का रकबा बढ़ाने पर सरकार विशेष जोर दे रही है।
उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग से भूमि की उर्वरा शक्ति प्रभावित हो रही है और लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
चन्द्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय में शुक्रवार को आयोजित कानपुर, चित्रकूटधाम एवं झांसी मंडल की संयुक्त मंडलीय खरीफ उत्पादकता गोष्ठी-2026 तथा जनपद स्तरीय खरीफ उत्पादकता गोष्ठी को संबोधित करते हुए श्री शाही ने कहा कि भारत में वैदिक काल से प्राकृतिक खेती की परंपरा रही है, जिसके कारण लोग स्वस्थ एवं निरोगी जीवन जीते थे। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार इस वर्ष प्राकृतिक खेती योजना के अंतर्गत 95 करोड़ रुपये व्यय करेगी।
कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। गोष्ठी परिसर में कृषि, बीज, कृषि रक्षा, मृदा परीक्षण, भूमि संरक्षण, रेशम, उद्यान, खाद्य प्रसंस्करण, लघु सिंचाई, इफको, कृभको, किसान कॉल सेंटर और पशुपालन विभाग समेत विभिन्न संस्थाओं द्वारा स्टॉल लगाए गए।
कृषि मंत्री ने कहा कि प्रदेश में खाद्यान्न उत्पादन विस्तार के लिए 110 लाख हेक्टेयर क्षेत्र का लक्ष्य निर्धारित किया गया है तथा गेहूं और धान के अत्यधिक आच्छादन को कम कर दलहनी फसलों का क्षेत्रफल चार लाख हेक्टेयर तक बढ़ाने की योजना बनाई गई है।
प्रमुख सचिव कृषि रवीन्द्र ने किसानों से रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग कम करने और हरी खाद तथा जैविक खाद के उपयोग को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने कहा कि भविष्य में कृषि विभाग की योजनाओं का लाभ लेने के लिए फार्मर रजिस्ट्री अनिवार्य होगी।
कृषि निदेशक डॉ. पंकज त्रिपाठी ने कहा कि बुंदेलखंड क्षेत्र में जल संकट को देखते हुए दलहन, तिलहन, मूंगफली और रागी जैसी कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। उन्होंने जल संरक्षण के लिए चेकडैम निर्माण और वर्षा जल संचयन पर भी जोर दिया।
गोष्ठी में तीनों मंडलों के 13 जनपदों के मुख्य विकास अधिकारियों और किसानों ने कृषि संबंधी समस्याओं एवं सुझावों को रखा। विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने किसानों को खरीफ फसलों, मृदा स्वास्थ्य, पशुपालन और आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी दी।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. संजीव गुप्ता, गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता, बीज विकास निगम के निदेशक टी.एम. त्रिपाठी, सहकारिता विभाग के आयुक्त एवं निबंधक योगेश, मंडलायुक्त एवं जिलाधिकारी समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी और किसान उपस्थित रहे।
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