गांधीनगर , फरवरी 27 -- गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने शुक्रवार को कहा कि प्राकृतिक खेती जैसे गंभीर विषय को विधानसभा में स्थान मिला है, यह आनंद की बात है।
श्री देवव्रत ने गुजरात विधानसभा परिसर में आयोजित प्राकृतिक कृषि परिसंवाद को संबोधित करते हुए रासायनिक खेती के गंभीर परिणामों और प्राकृतिक खेती के लाभ के बारे में विस्तृत मार्गदर्शन दिया। जैविक और प्राकृतिक खेती के बीच का अंतर स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि, जैविक खेती में एक एकड़ के लिए 300 क्विंटल गोबर खाद की आवश्यकता पड़ती है। उसके विपरीत, प्राकृतिक खेती सूक्ष्म जीवाणुओं की खेती है। देशी गाय के एक ग्राम गोबर में 300 करोड़ से अधिक जीवाणु होते हैं और गौमूत्र खनिजों का भंडार है। जीवामृत और घन जीवामृत के माध्यम से जमीन में केंचुओं और मित्र कीटों की संख्या बढ़ती है, जो प्राकृतिक रूप से जमीन को उर्वर बनाते हैं।
उन्होंने कहा कि वर्षों पहले कैंसर, डायबिटीज या हार्ट अटैक जैसे रोगों का प्रमाण नगण्य था, जबकि आज छोटे बच्चों में भी कैंसर देखने को मिलता है। नवजात शिशु के लिए अमृत समान मां के दूध में भी अब यूरिया और कीटनाशक पाये जा रहे हैं, ऐसा की शोध रिपोर्टों से पता चला है। भारत में हरित क्रांति के समय देश की धरती का ऑर्गेनिक कार्बन दो से ढाई फीसदी था, जो आज घटकर 0.5 फीसदी से भी नीचे जाता रहा है।
राज्यपाल ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि, जिस जमीन का ऑर्गेनिक कार्बन 0.5 फीसदी से नीचे जाता है, वह जमीन बंजर मानी जाती है। गुजरात में रासायनिक खेती वाली जमीन का ऑर्गेनिक कार्बन 0.5 फीसदी से नीचे पहुंच चुका है। इसके परिणामस्वरूप जमीन कठोर हो जाती है, वर्षा का पानी जमीन में नहीं उतरता और बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होती है। प्राकृतिक खेती में केंचुए प्राकृतिक रूप से जमीन में छिद्र बनाते हैं, जिसके परिणामस्वरूप वर्षा जल का जमीन में संचय होता है।
उन्होंने कहा कि देश के करोड़ों रुपये यूरिया-डीएपी की सब्सिडी के पीछे व्यय होते हैं। यदि प्राकृतिक खेती अपनायी जाये, तो यह खर्च बच सकता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में पूरे देश में राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन लागू हुआ है। राज्य सरकार के प्रयासों से गुजरात में वर्तमान में आठ लाख से अधिक किसानों ने प्राकृतिक कृषि अपनायी है। राज्यपाल ने कहा कि किसान प्रारंभ में अपने खेत के एक भाग में प्राकृतिक कृषि करें, यह आवश्यक है। इसके अतिरिक्त उन्होंने विधानसभा के सभी सदस्यों को आह्वान किया कि, प्रत्येक सदस्य अपने क्षेत्र के एक गांव को 'प्राकृतिक गांव' अवश्य बनाये।
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