बैतूल , जून 26 -- ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने के लिए एक जुलाई से प्रस्तावित वीबी जीरामजी (विकसित भारत-रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन ग्रामीण) योजना को लेकर बैतूल जिले में अब भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। योजना लागू होने में कुछ ही दिन शेष हैं, लेकिन जिला, जनपद और ग्राम पंचायत स्तर पर तैयारियां अधूरी बताई जा रही हैं।
योजना से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों के अनुसार अब तक उन्हें नई व्यवस्था के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश या प्रशिक्षण प्राप्त नहीं हुआ है। इसके कारण योजना के क्रियान्वयन को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
अब तक ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने का दायित्व मनरेगा के माध्यम से निभाया जा रहा था। प्रस्तावित जीरामजी योजना को एक जुलाई से लागू किया जाना है, लेकिन जिला और पंचायत स्तर पर अभी तक इसके संचालन को लेकर स्पष्ट निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। अधिकांश पंचायतें फिलहाल मनरेगा के तहत स्वीकृत अधूरे कार्यों को 30 जून तक पूरा करने में जुटी हैं।
सूत्रों के अनुसार प्रस्तावित योजना में रोजगार की अवधि 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन करने, मजदूरी का भुगतान सात दिन के भीतर सुनिश्चित करने तथा समय पर रोजगार उपलब्ध नहीं होने पर बेरोजगारी भत्ता देने जैसे प्रावधान शामिल किए जाने की संभावना है। हालांकि इन प्रावधानों के संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक दिशा-निर्देश जारी नहीं हुए हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी नई योजना को लेकर उत्सुकता के साथ संशय का माहौल बना हुआ है। व्यापक प्रचार-प्रसार और प्रशासनिक तैयारियों के अभाव में अब सभी की नजरें शासन द्वारा जारी किए जाने वाले अंतिम दिशा-निर्देशों और एक जुलाई को होने वाले निर्णय पर टिकी हैं।
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