पुणे , सितंबर 23 -- महाराष्ट्र की प्रसिद्व लावणी नृत्यांगना शकुंतला नागरकर का निधन हो गया है।

वह 66 वर्ष की थी। वह लंबे समय से कैंसर से पीड़ित थी।

सुश्री नागरकर के निधन से राज्य के सांस्कृतिक और लोक-कला जगत में शोक की लहर दौड़ गयी । उनके निधन को राज्य की पारंपरिक लावणी और संगीत बारी परंपरा के एक अहम दौर के समाप्त होने के तौर पर देखा जा रहा है।

मूल रूप से अहिल्यानगर की रहने वाली सुश्री नागरकर ने 11 साल की उम्र में पहली बार घुंघरू पहनकर लावणी नृत्य में अपना सफ़र शुरू किया था। उन्होंने पारंपरिक 'बैठकीची लावणी' और 'संगीत बारी' की एक प्रमुख कलाकार के तौर पर अपनी पहचान बनाई। उनके करियर का ज़्यादातर समय पुणे, सोलापुर और बेलगावी में प्रस्तुतियां देने और काम करने में बीता।

सुश्री नागरकर खास तौर पर लावणी के पारंपरिक रूप पर अपनी पकड़ के लिए जानी जाती थीं, जिसमें भावपूर्ण इशारे, शानदार हरकतें, चेहरे के भाव और बारीक बारीकियां शामिल थीं। उन्होंने अपने प्रदर्शनों के ज़रिए उन्होंने महाराष्ट्र की लोक संस्कृति की समृद्धि को जीवंत किया और आने वाली पीढ़ियों के लिए इसके पारंपरिक रूप को बचाने में मदद की।

उन्होंने लावणी को पारंपरिक तमाशा और संगीत बारी के मंचों से आगे ले जाने और इसे बड़े शहरी दर्शकों के सामने पेश करने में भी अहम भूमिका निभायी। सुश्री नागरकर ने भूषण कोरगावकर के निर्देशन में बने मशहूर थिएटर प्रोडक्शन 'संगीत बारी' से उनके जुड़ाव ने कई युवा और शहरी दर्शकों को असली लावणी के इतिहास, परंपराओं और कलात्मक समृद्धि से परिचित कराया।

इस क्षेत्र में उनके योगदान के लिए सुश्री नागरकर को कई सम्मान मिले, जिनमें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और शाहीर पट्टे बापूराव पुरस्कार शामिल हैं। उन्हें पिछले साल राज्य सरकार के कला पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था। लावणी में उनका योगदान सिर्फ़ प्रस्तुतियां देने तक ही सीमित नहीं था।

महाराष्ट्र प्रदेश भारतीय जनता पार्टी अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने उनके निधन पर दुख जताया और इस अनुभवी कलाकार को श्रद्धांजलि दी।

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