मुंबई , अगस्त 07 -- जन सुराज पार्टी के अध्यक्ष एवं प्रसिद्ध रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेतृत्व के साथ काम करने के लिए पार्टी की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष सुनील तटकरे को बदलने सहित कई अन्य शर्तें रखी हैं।

इस सिलसिले में मुंबई में बैठक में उपमुख्यमंत्री एवं राकांपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनेत्रा पवार, पार्टी नेता पार्थ पवार और प्रशांत किशोर शामिल हुए, जबकि जय पवार वर्चुअल तरीके से जुड़े। बातचीत के दौरान श्री प्रशांत किशोर ने पार्टी द्वारा पहले की बैठकों में तय किये गये ढांचागत सुधारों को लागू न कर पाने पर असंतोष जताया। उन्होंने कहा कि पार्टी को फिर से मज़बूत करने की किसी भी रणनीति के लिए राज्य नेतृत्व के साथ बेहतर तालमेल ज़रूरी है।

सूत्रों के मुताबिक श्री प्रशांत किशोर ने राकांपा की महाराष्ट्र इकाई के लिए एक समर्पित पूर्णकालिक प्रमुख नियुक्त करने का सुझाव दिया, जिन पर कोई अतिरिक्त ज़िम्मेदारी न हो और जो पूरी तरह से ज़मीनी स्तर पर संगठन को मज़बूत करने पर ध्यान दे सकें।

सूत्रों ने बताया कि श्री किशोर ने श्री तटकरे के कामकाज की आलोचना की और शीर्ष नेतृत्व को बताया कि मौजूदा ढांचे के तहत संगठन में कोई सार्थक बदलाव करना मुश्किल होगा।

इस अहम् बैठक में श्री जय पवार ने वर्चुअल रूप से हिस्सा लिया और श्री प्रशांत किशोर की मुख्य सलाहकार टीम ने भी इस पर गहन चर्चा की। इससे श्रीमती पवार पर पार्टी की नींव को नये सिरे से मजबूत करने का दबाव और बढ़ गया है। पूर्व उप मुख्यमंत्री श्री अजीत पवार के हेलीकाॅप्टर दुर्घटना में मौत के बाद पार्टी की कमान संभालने के बाद से ही श्रीमती पवार के सामने पार्टी को अनिश्चितता के माहौल से बाहर निकालने और पार्टी के खिलाफ बन रही नकारात्मक धारणाओं को खत्म करने की चुनौती है।

सूत्रों के मुताबिक श्री प्रशांत किशोर ने राकांपा का जो विश्लेषण किया है, उसमें बातचीत में भारी कमी और संगठनात्मक स्तर पर सुस्ती जैसी समस्याएं सामने आयी हैं। उन्होंने एक ऐसे समर्पित राज्य अध्यक्ष की पुरजोर वकालत की है, जिसका ध्यान सिर्फ़ एक ही काम पर हो यानी एक ऐसा स्वतंत्र नेता जिस पर कोई दूसरी ज़िम्मेदारी न हो और जो आने वाले चुनावों से पहले ज़मीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को एकजुट करने और संगठन को मजबूत करने में अपना पूरा समय दे सके। अब जब रणनीतिकार ने अपने पत्ते खोल दिये हैं, तो सबकी नज़रें देवगिरी और राकांपा मुख्यालय पर टिकी हैं। अब फ़ैसला श्रीमती पवार को करना है। राजनीतिक हलकों में इस बात का इंतज़ार है कि क्या नेतृत्व किशोर की बनायी नयी कार्य-योजना को लागू करने के लिए श्री तटकरे जैसे अनुभवी और कद्दावर नेताओं को नाराज़ करने का जोखिम उठाएगा या नहीं।

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