नयी दिल्ली , मई 13 -- राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामसुब्रमण्यन ने कहा कि प्रवासी श्रमिकों को अधिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है क्योंकि उनमें से अधिकतर असंगठित क्षेत्र से संबंधित हैं।

न्यायमूर्ति रामसुब्रमण्यन ने बुधवार को 'प्रवासी श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा: सरकार और निजी क्षेत्र की साझा जिम्मेदारी' विषय पर अपनी कोर ग्रुप की बैठक में कहा कि प्रवासी श्रमिक असंगठित क्षेत्र से जुड़े होने के कारण सबसे अधिक चुनौतियों का सामना करते हैं। भाषा की बाधाएं, लगातार स्थान परिवर्तन और स्थायी आवास का अभाव उन्हें अपने अधिकारों की रक्षा करने से रोकता है। उन्होंने कहा कि भारत में श्रमिकों की सुरक्षा के लिए मजबूत कानून मौजूद हैं, लेकिन उनकी प्रभावी क्रियान्वयन सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।

उन्होंने कहा कि केवल नीतियां बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि अंतरराज्यीय समन्वय, पोर्टेबल सामाजिक सुरक्षा और श्रम कानूनों के सख्त पालन जैसे प्रणालीगत सुधारों की जरूरत है। उन्होंने निर्माण, होटल, व्यापार और घरेलू कार्यों में लगे प्रवासी श्रमिकों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई।

एनएचआरसी के सदस्य जस्टिस (डॉ) बिद्युत रंजन सारंगी ने कहा कि प्रवासी मजदूरों को न तो उचित सम्मान मिलता है और न ही समय पर मजदूरी। उन्होंने कहा कि मजदूरी का समय पर भुगतान न होना उनके घर छोड़कर काम करने के उद्देश्य को ही विफल कर देता है। उन्होंने श्रमिकों के लिए पर्याप्त वेतन, आवास, स्वास्थ्य सुविधाएं और बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

एनएचआरसी के महासचिव भरत लाल ने कहा कि दुनिया भर में प्रवासी श्रमिक अर्थव्यवस्था को गति दे रहे हैं और भारत की लगभग 28.9 प्रतिशत आबादी प्रवासी श्रमिकों की है। उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान प्रवासी मजदूरों द्वारा झेली गई कठिनाइयों का उल्लेख करते हुए कहा कि कई आउटसोर्स श्रमिकों को न्यूनतम वेतन तक नहीं मिलता। उन्होंने 'वन नेशन वन राशन कार्ड' योजना की सराहना करते हुए कहा कि कानून और उसके क्रियान्वयन के बीच की खाई को पाटना जरूरी है।

बैठक में विभिन्न मंत्रालयों, उद्योग संगठनों, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और विशेषज्ञों ने प्रवासी श्रमिकों के कल्याण के लिए कई सुझाव दिए। इनमें राष्ट्रीय प्रवासी श्रमिक डैशबोर्ड बनाना, ई-श्रम पोर्टल को अन्य सरकारी डेटाबेस से जोड़ना, श्रमिकों के लिए बहुभाषी शिकायत निवारण प्रणाली विकसित करना, समयबद्ध शिकायत समाधान व्यवस्था लागू करना और 'लिविंग वेज' की अवधारणा को बढ़ावा देना शामिल है।

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