रांची , अक्टूबर 24 -- झारखंड भाकपा माले के राज्य सचिव मनोज भक्त ने कहा कि गुजरात में प्रवासी मजदूरों की स्थिति चिंताजनक रूप से गंभीर होती जा रही है।
इसकी चपेट में झारखंड समेत अन्य राज्यों के बड़ी संख्या में मजदूर हैं, जो वहाँ से दयनीय परिस्थितियों में लौटने के लिए मजबूर हो रहे हैं।
झारखंड सरकार को अविलंब पहल करते हुए गुजरात में अपना एक प्रतिनिधिमंडल भेजना चाहिए और मजदूरों के हित में केंद्र तथा गुजरात सरकार से वार्ता करनी चाहिए।
वहाँ की स्थिति का जायजा लेने और मजदूरों की मदद के लिए पूर्व विधायक एवं भाकपा माले पोलित ब्यूरो सदस्य कॉ. विनोद कुमार सिंह सूरत तथा अन्य प्रभावित क्षेत्रों के दौरे पर हैं। वे मजदूरों से मुलाकात कर रहे हैं और मजदूरों को अमानवीय श्रम स्थितियों का सामना क्यों करना पड़ रहा है, इस पर उनसे विचार विमर्श कर रहे हैं। यह समय है कि हेमंत सरकार मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित करे तथा रोजगार छिन जाने की स्थिति में गुजरात और गृह राज्य झारखंड में उनके लिए वैकल्पिक व्यवस्था करे।
ज्ञात हो कि कपड़ा एवं हीरा उद्योग में काम कर रहे मजदूरों पर 12 घंटे काम करने का दबाव है और उनकी साप्ताहिक छुट्टियाँ भी समाप्त कर दी गई हैं। मजदूरों को कम मजदूरी मिल रही है। कई ऐसे उदाहरण भी सामने आए हैं, जिनमें मजदूरी के बजाय केवल दो वक्त के भोजन के एवज में उनसे 12 घंटे काम कराया जा रहा है।
भाकपा माले इसे नए श्रम कोडों का नतीजा मानती है और केंद्र तथा गुजरात सरकार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहती है कि सरकारों को कंपनी मालिकों के बजाय मजदूरों के पक्ष में खड़ा होना चाहिए। मजदूरों के साथ हो रही ज्यादतियों के लिए जिम्मेदार मालिकों पर कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
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