गुवाहाटी , फरवरी 22 -- प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 19-21 फरवरी के बीच असम में यहां अपने 34वें क्षेत्रीय अधिकारी त्रैमासिक सम्मेलन (क्यूसीजेडओ) का आयोजन किया। यह वित्तीय वर्ष के समापन से पहले सामरिक महत्व का आयोजन था।

यह तीन दिवसीय सम्मेलन ईडी निदेशक की अध्यक्षता में आयोजित किया गया। इसमें सभी विशेष निदेशक, अतिरिक्त निदेशक, संयुक्त निदेशक, उप और सहायक कानूनी सलाहकार, मुख्यालय और क्षेत्र में तैनात वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। उत्तर पूर्वी क्षेत्र में सम्मेलन आयोजित करने का निर्णय निदेशालय के क्षेत्र में बढ़ते परिचालन केंद्र को दर्शाता है। पिछले दो-तीन वर्षों में ईडी ने नये कार्यालय खोलकर और लगभग सभी राज्यों में परिचालन स्थापित करके पूर्वोत्तर में अपनी उपस्थिति बढ़ायी है।

एजल में एक कार्यालय शुरू करने की कोशिश जारी हैं। इस क्षेत्र ने विशेष रूप से साइबर अपराध और मादक पदार्थों की तस्करी के मामलों में कई प्रवर्तन कार्रवाइयां की गयी हैं, जिन्हें म्यांमार और बंगलादेश की सीमाओं के निकट होने के कारण उच्च जोखिम क्षेत्र माना जाता है। गुवाहाटी सम्मेलन वित्तीय वर्ष के अंत से पहले अंतिम त्रैमासिक समीक्षा होने के कारण अलग महत्व रखता है। चर्चाओं में सार्थक लक्ष्यों की प्राप्ति, जांचों का तर्कसंगत समापन, अभियोजन शिकायतों का समय पर दाखिल करना और धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत जब्ती और दंड का कानूनी रूप से स्थायी होना सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।

एक खास बात आंकड़ाें की विश्वसनीयता को बरकरार रखने की थी। इसमें क्षेत्रीय प्रमुखों को 31 मार्च 2026 से पहले ईडी के आंतरिक केस प्रबंधन प्रणाली में सटीक और समायोजित वास्तविक समय डेटा प्रविष्टि सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। मौजूदा वित्तीय वर्ष के दौरान 500 अभियोजन शिकायतें दाखिल करने का लक्ष्य दोहराया गया और क्षेत्र में तैनात टीमों से कोशिशें तेज करने को कहा गया। क्षेत्रीय कार्यालयों को सलाह दी गयी है कि वे अंतिम अभियोजन शिकायतें दर्ज करने के लिए पुख्ता मामलों की पहचान करें और असाधारण रूप से जटिल मामलों में जांच की समय सीमा को घटाकर एक से दो वर्ष करें।

अधिकारियों को आर्थिक अपराधों के बदलते तौर-तरीकों से निपटने के लिए महत्वपूर्ण नये मामलों की पहचान करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। इसके तहत कई प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को चिह्नित किया गया। इनमें दुबई और सिंगापुर जैसे विदेशी न्यायक्षेत्रों में जमा संपत्तियों की निगरानी करना, चालान हेरफेर के माध्यम से व्यापार-आधारित धन शोधन पर अंकुश लगाना और कुर्की की कार्यवाही को विफल करने के लिए दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता के दुरुपयोग की जांच शामिल है।

इसके अतिरिक्त डिजिटल अरेस्ट घोटाले, साइबर धोखाधड़ी, अवैध सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म, मादक पदार्थों के तस्करों के वित्तीय नेटवर्क, हवाला संपर्कों, शेयर बाजार में हेरफेर और संदिग्ध विदेशी वित्त पोषण चैनलों को भी लक्षित कार्रवाई के लिए चिह्नित किया गया है।

इस सम्मेलन में पारस्परिक विधिक सहायता संधि (एमएलएटी) के अनुरोधों, अनुरोध पत्र, प्रत्यर्पण प्रक्रियाओं जैसे औपचारिक तंत्रों और इंटरपोल चैनलों तथा वित्तीय सूचनाओं का साझाकरण करने वाले अनौपचारिक मंचों के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्व का उल्लेख किया गया। अधिकारियों को प्रभावी सीमा-पार परिसंपत्ति वसूली के लिए विदेशी समकक्षों के साथ संस्थागत साझेदारी को मजबूत करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

अंतर-एजेंसी समन्वय को बढ़ाने के लिए भारतीय दिवाला और शोधन अक्षमता बोर्ड (आईबीबीआई), एफआईयू-आईएनडी, भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) और मादक द्रव्य नियंत्रण ब्यूरो (एनसीबी) सहित विभिन्न एजेंसियों की प्रस्तुतियां भी दी गयी। मुख्य चर्चाओं में दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) एवं धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के अंतर्संबंधों, फिननेट 2.0 इंटेलीजेंस सिस्टम, उभरते साइबर अपराध रुझानों और नशीले पदार्थों की तस्करी की वित्तीय जांच जैसे विषयों को शामिल किया गया।

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