चेन्नई , मार्च 31 -- भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास के शोध समूह इंडिया सेंटर फॉर लैब ग्रोन डायमंड (इनसेंट-एलजीडी) ने प्रयोगशाला में निर्मित हीरो (लैब-ग्रोन डायमंड) के विभिन्न उपयोगों को बढावा देने के लिए तीन दिवसीय सम्मेलन का आयोजन किया।

इस सम्मेलन का उद्देश्य रत्न एवं आभूषण से परे क्वांटम प्रौद्योगिकियों, फोटोनिक्स, सेंसिंग और मौसम विज्ञान के क्षेत्र में इस हीरे के उपयोग की संभावना तलाशना और उसे बढ़ावा देना है।

अनुसंधान समूह द्वारा आईआईटी-मद्रास के अपने परिसर में 'डायमंड एंड इमर्जेंट मैटेरियल्स - साइंस एंड टेक्नोलॉजी' (आईसीडीईएम 2026) के थीम के तहत इस सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें ऊर्जा, अंतरिक्ष और अन्य अनुप्रयोगों के लिए हीरा और संबंधित कार्बन सामग्रियों के उपयोग पर मुख्य रूप से जोर दिया गया।

हीरा विज्ञान, क्वांटम प्रौद्योगिकियों और अगली पीढ़ी की इलेक्ट्रॉनिक सामग्रियों की प्रगति पर केंद्रित इस वैश्विक मंच पर विज्ञान, इलेक्ट्रॉनिक्स और क्वांटम तकनीक में काम करने वाले लगभग 250 वैश्विक और भारतीय शोधकर्ता, वैज्ञानिक और उद्योग पेशेवर एक साथ आए तथा विभिन्न विषयों पर चर्चाएं कीं। इसका आयोजन अमेरिका के एरिजोना विश्वविद्यालय और रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (जीजेईपीसी) के सहयोग से किया गया था, जो भारत में विशेष रूप से डायमंड और उभरती सामग्री प्रौद्योगिकियों को समर्पित अपनी तरह का पहला आयोजन है।

सम्मेलन के महत्वपूर्ण परिणामों में हीरा और उभरती प्रौद्योगिकियों में वैश्विक सहयोग को मजबूत करना, स्वदेशी तकनीकी विकास को आगे बढ़ाना और 'लैब-ग्रोन डायमंड' के उत्पादन में आत्मनिर्भरता प्राप्त करना शामिल है।

सम्मेलन में अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकियों जैसे कि मॉडलिंग, सिमुलेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस/मशिन लर्निंग (एआई/एमएल) आधारित निगरानी तकनीकों को शामिल करने पर भी ध्यान केंद्रित किया गया ताकि डायमंड और कार्बनयुक्त सामग्रियों को औद्योगिक उपयोग के लिए प्रासंगिक बनाया जा सके।

इनसेंट-एलजीडी के मुख्य शोधकर्ता प्रो. एम एस रामचंद्र राव ने कहा, "हमारे अनुसंधान समूह का मिशन प्रयोगशाला आधारित हीरा प्रौद्योगिकियों के लिए अत्याधुनिक सुविधाओं का निर्माण कर एक राष्ट्रीय केंद्र स्थापित करना है। हम जल्द ही 'लैब-ग्रोन डायमंड' उद्योग के लिए आवश्यक लोगों को प्रशिक्षित करने के लिए पाठ्यक्रम भी शुरू करेंगे। आईसीडीईएम 2026 जैसे वैश्विक सम्मेलन भारतीय शोधकर्ताओं के लिए दुनिया के सर्वश्रेष्ठ वैज्ञानिकों से सीखने और भारतीय प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण हैं।"आईसीडीईएम 2026 के अध्यक्ष और आईआईटी-एम के प्रोफेसर प्रो. एम. एस. रामचंद्र राव ने घोषणा की कि सम्मेलन का अगला संस्करण, आईसीडीईएम 2027, 27 से 29 जनवरी 2027 तक आईआईटी-मद्रास में आयोजित किया जाएगा।

इनसेंट-एलजीडी में चल रहे शोध के बारे में विस्तार से बताते हुए इसके सह-मुख्य शोधकर्ता प्रो. सत्यन सुब्बैया (मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग) ने कहा, "हमारे उद्देश्य लैब-ग्रोन डायमंड बनाने की तकनीकों में नवाचार और सुधार करना और उन्हें रत्नों के लिए लागू करना तथा आभूषणों से परे संभावनाओं को दिखाना है। हम भारत में अगली पीढ़ी के उद्यमियों को इन हीरों से अन्य तकनीकी अनुप्रयोगों की ओर कदम बढ़ाते देख रहे हैं।"केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय के सहयोग से स्थापित यह शोध समूह स्वदेशी प्रौद्योगिकियों को विकसित करके भारत को प्रयोगशाला में विकसित हीरे के उद्योग में विश्व भर में सबसे आगे ले जाने की दिशा में काम कर रहा है।

आईआईटी-मद्रास ने मंगलवार को कहा कि इनसेंट-एलजीडी द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियां भारतीय स्टार्टअप और उद्योग के लिए उपलब्ध होंगी ताकि भारत गुणवत्तापूर्ण रत्नों को बनाने और इलेक्ट्रॉनिक-ग्रेड हीरे के उत्पादन में आत्मनिर्भर बन सके। यह तकनीकी क्षमताओं को बढ़ाएगा, निर्यात को बढ़ावा देगा और नवाचार तथा उद्यमिता के माध्यम से आर्थिक विकास को गति देगा।

गौरतलब है कि प्रयोगशाला में विकसित हीरे को जमीन से खनन करने के बजाय एक नियंत्रित तकनीकी प्रक्रिया के माध्यम से प्रयोगशाला में उत्पादित किया जाता है। इसमें प्राकृतिक हीरे के समान ही भौतिक, रासायनिक और ऑप्टिकल गुण होते हैं। हालांकि, ये हीरे रत्न और आभूषणों के अलावा अन्य अनुप्रयोगों के लिए भी उपयुक्त हैं।

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