प्रयागराज , सितंबर 03 -- उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में पुलिस कमिश्नर पीयूष मोर्डिया ने रिश्वत के आरोप में हंडिया थाने के प्रभारी निरीक्षक अनूप सरोज और दरोगा बृजेश सिंह को गुरुवार को निलंबित कर दिया। दोनों पुलिसकर्मियों की भूमिका मकान पर कब्जा कराने के मामले में सामने आई थी और उन पर चार लाख रुपये रिश्वत मांगने का आरोप लगा था।

पुलिस सूत्रों के अनुसार अल्लापुर निवासी कारोबारी रोहन श्रीवास्तव ने हंडिया क्षेत्र के धौरहरा में एक मकान खरीदा था। आरोप है कि मकान का कब्जा मिलने के बाद दूसरे पक्ष के अरुण कुशवाहा और अन्य लोगों ने हंडिया पुलिस की मिलीभगत से दोबारा मकान पर कब्जा कर लिया।

पीड़ित परिवार का आरोप है कि उन्होंने मामले की शिकायत हंडिया थाने में की, लेकिन पुलिस ने अपेक्षित कार्रवाई नहीं की। इस दौरान मकान के अंदर की दीवारें तोड़कर नए सिरे से दीवार खड़ी कर दी गई। परिवार की ओर से तहरीर दिए जाने के बावजूद संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज नहीं किया गया।

आरोप है कि इसके बाद बिचौलियों के माध्यम से इंस्पेक्टर और दरोगा ने मकान का कब्जा वापस दिलाने के नाम पर परिवार से चार लाख रुपये रिश्वत मांगी। परेशान परिवार ने रकम दे दी, लेकिन इसके बाद भी मकान का कब्जा वापस नहीं मिला। मामले से परेशान परिवार ने पुलिस कमिश्नर पीयूष मोर्डिया से मुलाकात कर पूरी जानकारी दी। पुलिस कमिश्नर ने प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए गोपनीय जांच कराई। प्रारंभिक जांच में आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाने के बाद दोनों पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। मामले की जांच जारी है।

सूत्रों के अनुसार पुलिस कमिश्नर की कार्रवाई के बाद कथित तौर पर रिश्वत के रूप में दी गई चार लाख रुपये की रकम भी परिवार को वापस मिल गई है। अनूप सरोज करीब पांच महीने पहले हंडिया थाने में प्रभारी निरीक्षक के पद पर तैनात हुए थे। इस दौरान उनके खिलाफ कई शिकायतें पुलिस कमिश्नर तक पहुंचने की बात सामने आई है। वहीं, दरोगा बृजेश सिंह करीब नौ महीने से हंडिया थाने में तैनात हैं। पीड़ित परिवार ने दोनों पुलिसकर्मियों पर आरोप लगाए हैं।

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