प्रयागराज , अगस्त 13 -- उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में समाजवादी पार्टी (सपा) सरकार के कार्यकाल में पार्क की जमीन को कब्रिस्तान में शामिल किए जाने का मामला सामने आया है। नगर निगम के महापौर उमेश चंद्र गणेश केसरवानी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर प्रकरण की जांच कराने और पार्क की भूमि को मुक्त कराकर उसका मूल स्वरूप बहाल कराने की मांग की है।

महापौर के पत्र के अनुसार पटेल नगर हाउसिंग स्कीम, दरियाबाद में पार्क के लिए भूमि लेआउट में चिन्हित थी। लेआउट में पार्क और खेल मैदान को त्रिकोण के रूप में दर्शाया गया था। कॉलोनी के बच्चे वर्ष 2006 तक इस स्थान का खेलकूद के लिए उपयोग करते थे और यहां सामाजिक गतिविधियां भी होती थीं।

पत्र में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2006 में तत्कालीन सपा सरकार के कार्यकाल के दौरान अचानक इस भूमि को दरियाबाद कब्रिस्तान में शामिल कर दिया गया। आरोप है कि 14, 15 और 18 अगस्त 2006 को सार्वजनिक अवकाश के दौरान बड़ी संख्या में मजदूर लगाकर महज तीन दिनों में पार्क के चारों ओर कच्ची-पक्की दीवार खड़ी कर दी गई।

महापौर ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि तत्कालीन शहरी विकास मंत्री मोहम्मद आजम खान द्वारा मोबाइल फोन पर धमकियां दिए जाने के कारण अधिकारी कार्रवाई नहीं कर सके। पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि उक्त कार्रवाई आजम खान और माफिया अतीक अहमद की सहमति से हुई थी। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महापौर के पत्र का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी प्रयागराज को आवश्यक कार्रवाई के लिए निर्देशित किया है। जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने प्रकरण की जांच के लिए राजस्व विभाग और प्रयागराज विकास प्राधिकरण (पीडीए) की दो अलग-अलग टीमें गठित की हैं।

अधिकारियों के अनुसार जांच में संबंधित भूमि के राजस्व अभिलेख, हाउसिंग स्कीम का मूल लेआउट, भूमि के उपयोग में हुए बदलाव और वर्ष 2006 में कराए गए निर्माण से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जाएगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पार्क की भूमि को किस प्रक्रिया के तहत कब्रिस्तान में शामिल किया गया था।

जांच के निष्कर्ष के आधार पर पार्क की भूमि के संबंध में आगे की कार्रवाई और उसके मूल स्वरूप को बहाल करने पर निर्णय लिया जा सकता है।

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