प्रयागराज , जून 22 -- उत्तर प्रदेश में प्रयागराज जिले के मांडा क्षेत्र सहित कई इलाकों में धान की नर्सरी तैयार करने का समय शुरू हो गया है, लेकिन सहकारी समितियों पर डीएपी उर्वरक उपलब्ध न होने से किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि धान की नर्सरी डालने के इस महत्वपूर्ण समय में डीएपी की सबसे अधिक आवश्यकता होती है, लेकिन सहकारी समितियों पर ताले लटके होने और उर्वरक का स्टॉक न होने के कारण उन्हें निजी दुकानों से महंगे दामों पर खाद खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
समिति सचिव आशीष शुक्ला ने बताया कि वर्तमान में वसूली कार्य चल रहा है, जिसके कारण डीएपी की आपूर्ति में विलंब हो रहा है। उन्होंने कहा कि उर्वरक उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। मेंड़रा गांव के एक किसान ने कहा कि खेती-किसानी केवल रोजगार का साधन नहीं, बल्कि गांव और देश की अर्थव्यवस्था तथा जीवन का आधार है। ऐसे समय में किसानों को खाद के लिए भटकना पड़े, यह गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने प्रशासन से समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने की मांग की।
मांडा क्षेत्र की स्थिति भी इससे अलग नहीं है। क्षेत्र की आठ साधन सहकारी समितियों में से किसी भी समिति में डीएपी का स्टॉक उपलब्ध नहीं है। किसान लगातार समितियों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें निराशा ही हाथ लग रही है।
मांडा समिति के सचिव शिव बहादुर सिंह ने बताया कि डीएपी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं और जैसे ही स्टॉक प्राप्त होगा, किसानों को वितरित किया जाएगा। किसानों का कहना है कि उर्वरक की आवश्यकता वर्तमान समय में है। यदि धान की नर्सरी तैयार होने के बाद डीएपी उपलब्ध होती है तो उसका अपेक्षित लाभ नहीं मिल सकेगा। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से तत्काल सहकारी समितियों में डीएपी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि खरीफ सीजन की तैयारियां प्रभावित न हों।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार धान की नर्सरी तैयार करने के दौरान डीएपी की समय पर उपलब्धता फसल की बेहतर वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में आपूर्ति में देरी किसानों की चिंता बढ़ा रही है।
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