लखनऊ , सितंबर 23 -- राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता प्रमोद तिवारी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि चुनाव आयोग के निर्णयों से ''वोट चोरी'' का मामला सामने आया है। उन्होंने दावा किया कि इस संबंध में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की असहमति वाले निर्णयों से भी स्थिति स्पष्ट होती है।

श्री तिवारी ने बुधवार को यहां जारी एक बयान में कहा कि पिछले 10 माह में 14 ऐसे निर्णय लिए गए, जिनमें दोनों चुनाव आयुक्तों की राय अलग थी। उनके अनुसार इन निर्णयों में मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में रही। उन्होंने दावा किया कि इससे 12 करोड़ से अधिक मतदाताओं के मताधिकार पर सवाल खड़ा हुआ है और हरियाणा, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल तथा असम के चुनाव परिणाम प्रभावित हुए हैं।

उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र और संविधान के लिए गंभीर मामला है तथा इससे देश की छवि प्रभावित हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि ''एक बनाम दो'' के बहुमत से लिए गए इन निर्णयों में मुख्य चुनाव आयुक्त ने असंवैधानिक तरीके से भाजपा की मदद की, जिसके कारण संबंधित राज्यों के चुनाव परिणाम बदल गए।

श्री तिवारी ने मांग की कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उच्चतम न्यायालय की निगरानी में जांच कराई जाए, ताकि पूरे मामले की सच्चाई देश के सामने आ सके। उन्होंने जनता से लोकतांत्रिक और अहिंसात्मक तरीके से भाजपा सरकार के खिलाफ आवाज उठाने का आह्वान भी किया।

उन्होंने कहा कि देश में निष्पक्ष चुनाव होने चाहिए और जनादेश के अनुरूप सरकार का गठन होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा परिस्थितियां स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों तथा संविधान निर्माताओं के सिद्धांतों का अपमान हैं।

श्री तिवारी ने संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग करते हुए कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को सदन में बुलाकर उनकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त को निलंबित करने, उनके खिलाफ संविधान सम्मत कार्रवाई करने और मुकदमा दर्ज करने की भी मांग की।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित