पटना , सितंबर 12 -- ोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम के प्रथम अपीलीय प्राधिकार के रूप में प्रमंडलीय आयुक्त राजेश कुमार ने पटना प्रमंडल के भोजपुर, नालंदा, कैमूर (भभुआ), बक्सर, रोहतास एवं पटना जिलों से संबंधित 30 मामलों की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान अधिकांश मामलों का ऑन-स्पॉट निष्पादन किया गया। वहीं, जिन मामलों में विस्तृत जांच अथवा अन्य स्तर पर कार्रवाई आवश्यक थी, उनमें संबंधित पदाधिकारियों को शीघ्र जांच कर प्रतिवेदन उपलब्ध कराने तथा अगली सुनवाई में अनुपालन की समीक्षा करने का निर्देश दिया गया।
नालंदा जिले के गोरेलाल प्रसाद द्वारा प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत निर्मित घोसरावां -रानीसराय सड़क के किनारे नाला निर्माण नहीं किए जाने के कारण स्थानीय लोगों को होने वाली कठिनाइयों के बारे में बताया गया।
प्रमंडलीय आयुक्त ने अधीक्षण अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, नालंदा को परिवादी के साथ मामले की समीक्षा करने तथा जिलाधिकारी, नालंदा के माध्यम से प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
बक्सर जिले के रामजी यादव द्वारा जिला शिक्षा कार्यालय, बक्सर की मिलीभगत से फर्जी डिग्री पर बहाल शिक्षक से संबंधित शिकायत की गई। मामले की सुनवाई करते हुए प्रमंडलीय आयुक्त ने जिला शिक्षा पदाधिकारी, बक्सर को मामले की शीघ्र जांच कर प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
बक्सर के मोहम्मद नासिर हसन द्वारा एक शिक्षक के विरुद्ध भुगतान की गई राशि की वसूली से संबंधित शिकायत की गई थी। मामले की सुनवाई करते हुए प्रमंडलीय आयुक्त ने जिलाधिकारी बक्सर को संबंधित नीलाम पत्र वाद को तेजी से क्रियान्वित करने का निर्देश दिया। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि यदि जांच में तत्कालीन बीडीओ की भूमिका पाई जाती है, तो उनके विरुद्ध भी आरोप गठित करते हुए नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
बक्सर की पूनम देवी द्वारा शिकायत की गई कि उन्हें बिना किसी कारण जीविका के सीएम पद से हटा दिया गया है। प्रमंडलीय आयुक्त ने मामले में जिलाधिकारी, बक्सर को डीडीसी के माध्यम से जांच कराकर प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
बक्सर के कुंजबिहारी राय द्वारा बक्सर जिला अंतर्गत अर्जित किसानों की भूमि के आरजी भुगतान से संबंधित शिकायत की गई। मामले की सुनवाई करते हुए प्रमंडलीय आयुक्त ने संबंधित जिला भू-अर्जन पदाधिकारी को 15 दिनों के अंदर मामले का नियमानुकूल निष्पादन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस मामले की पुनः समीक्षा की जाएगा।
प्रमंडलीय आयुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त मामलों का संवेदनशीलता, पारदर्शिता एवं तत्परता के साथ निष्पादन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि जिन मामलों में जांच अथवा प्रतिवेदन की आवश्यकता है, उनमें निर्धारित समय-सीमा के भीतर कार्रवाई पूरी कर अनुपालन प्रतिवेदन उपलब्ध कराया जाए, जिससे परिवादियों को शीघ्र न्याय एवं राहत मिल सके।
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