देवरिया , मई 20 -- सेंटर फॉर रिस्पांसिबल बिजनेस (सीआरबी) के असिस्टेंट डायरेक्टर संजीव कुमार ने कहा कि आने वाले समय में वही व्यवसाय मजबूत होंगे, जो अपने सामाजिक, पर्यावरणीय और आर्थिक प्रभावों को मापने और समझने में सक्षम होंगे।
देवरिया से लगभग 12 किलोमीटर दूर बरपार गांव स्थित जागृति उद्यम केंद्र के बरगद सभागार में आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला का बुधवार को समापन हुआ। 'टीईईबी एग्रीफूड फ्रेमवर्क फॉर बिजनेस डिसीजन मेकिंग: मापन और मूल्यांकन की भूमिका' विषय पर आयोजित इस कार्यशाला में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए 30 से अधिक एफपीओ, फूड प्रोसेसिंग कंपनियों के निदेशक, सीईओ और कृषि उद्यमियों ने भाग लिया।
इस अवसर पर श्री कुमार ने कहा कि कृषि एवं खाद्य व्यवसाय अब केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रह सकते। व्यवसायों को अपने सामाजिक, पर्यावरणीय और आर्थिक प्रभावों को समझते हुए दीर्घकालिक एवं जिम्मेदार निर्णय लेने होंगे। उन्होंने प्रतिभागियों को प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और टिकाऊ व्यवसाय मॉडल की आवश्यकता के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
कार्यक्रम में यूएनईपी टीम की सदस्य शालिनी ने कहा कि कृषि व्यवसायों के लिए केवल लाभ कमाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी जरूरी है कि उनका कार्य समुदाय, पर्यावरण और स्थानीय आजीविका पर सकारात्मक प्रभाव डाले। उन्होंने प्रतिभागियों को व्यवसाय में 'इम्पैक्ट मेजरमेंट' की भूमिका समझाई।
यूएनईपी की रिया ने आधुनिक व्यवसाय मॉडल पर अपने विचार व्यक्त किए। वहीं, जागृति उद्यम केंद्र के इन्क्यूबेशन डायरेक्टर विश्वास पांडेय ने कार्यशाला के उद्देश्य तथा जागृति की विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी। जागृति के मनोज वर्मा ने कहा कि टीईईबी एग्रीफूड फ्रेमवर्क कृषि एवं खाद्य व्यवसायों को अपने कार्यों और प्रभावों को बेहतर ढंग से समझने में मदद करता है। इसके माध्यम से व्यवसायों को वित्तीय समावेशन, ब्रांडिंग, सीएसआर सहयोग और सरकारी योजनाओं से जुड़ने के नए अवसर प्राप्त हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में सीआरबी और जागृति की टीम प्रतिभागियों को हैंडहोल्डिंग सहयोग भी प्रदान करेगी।
इस दौरान सीआरबी टीम से नित्या, दवनीत और तेजस्विनी तथा जागृति टीम से धीरेंद्र यादव, स्नेहा, श्वेता और रवि सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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