भुवनेश्वर , अगस्त 29 -- पूर्व केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को बीजू जनता दल (बीजद) अध्यक्ष नवीन पटनायक पर खनिज संबंधी कानून को लेकर ओडिशा के लोगों को गुमराह करने और तथ्यों को छिपाकर बेबुनियाद आशंकाएं पैदा करने का आरोप लगाया।
संबलपुर से भारतीय जनता पार्टी के सांसद श्री प्रधान ने खनिज एवं खनन (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2026 को लेकर विपक्ष के नेता श्री पटनायक की ओर से ओडिशा के सांसदों को लिखे पत्र के जवाब में यह प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राजनीतिक बहस लोकतंत्र का अभिन्न हिस्सा है, लेकिन सांसदों की बड़ी जिम्मेदारी ओडिशा के आर्थिक और ढांचागत हितों की रक्षा करने के साथ-साथ राष्ट्रीय विकास में योगदान देने की भी है।
उन्होंने संशोधन अधिनियम को ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि इससे आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा, बुनियादी ढांचे के विकास में तेजी आएगी, राज्य के राजस्व की सुरक्षा होगी और नागरिकों को महंगाई के दबाव से बचाने में मदद मिलेगी।
श्री पटनायक की इस आशंका को खारिज करते हुए कि संशोधित कानून से ओडिशा को राजस्व का नुकसान होगा, श्री प्रधान ने इसे ''पूरी तरह निराधार'' बताया। उन्होंने दावा किया कि खनन से होने वाले कुल राजस्व का करीब 90 प्रतिशत राज्य के राजकोष में आता रहेगा। उनके अनुसार ओडिशा को नीलामी प्रीमियम का 110 प्रतिशत, 15 प्रतिशत रॉयल्टी और जिला खनिज प्रतिष्ठान (डीएमएफ) की पूरी राशि मिलती रहेगी।
उन्होंने आरोप लगाया कि 2014 से पहले खनिज संसाधनों का आवंटन मनमाने और अपारदर्शी तरीके से पसंदीदा परिवारों और संस्थाओं को किया जाता था, जिसके कारण ओडिशा का वार्षिक खनन राजस्व करीब 5,000 करोड़ रुपये तक सीमित था।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 2015 में लाये गये खनिज कानून संशोधन के बाद पारदर्शी ई-नीलामी व्यवस्था लागू हुई और रॉयल्टी की दर 10 से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दी गयी। इसके परिणामस्वरूप ओडिशा का वार्षिक खनन राजस्व लगभग दस गुना बढ़कर 50,000 करोड़ रुपये हो गया।
श्री प्रधान ने कहा कि खनिज संपदा वाले जिलों केओंझर, सुंदरगढ़, झारसुगुड़ा, अंगुल और जाजपुर में खनिज-युक्त भूमि पर मनमाने और असीमित शुल्क लगाए जाने से खदानों और उद्योगों के बंद होने का खतरा पैदा हो सकता था। इससे लाखों युवाओं की आजीविका प्रभावित होने के साथ ही इस्पात, सीमेंट, बिजली और कोयले जैसे कच्चे माल की लागत बढ़ सकती थी, जिसका बोझ मध्यम वर्ग पर पड़ता।
उन्होंने कहा कि संशोधित कानून की धारा 9डी ऐसे शुल्कों की एक निश्चित सीमा निर्धारित करती है और इससे मनमाने कराधान की आशंका समाप्त हो जाती है।
श्री प्रधान ने दावा किया कि 2015 के बाद ओडिशा को डीएमएफ के माध्यम से खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए 37,000 करोड़ रुपये से अधिक प्राप्त हुए हैं।
उन्होंने नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि पिछली बीजद सरकार के दौरान 976 ऐसे गांवों में 983 करोड़ रुपये खर्च किए गए जो खनन से प्रभावित नहीं थे, जबकि सीधे प्रभावित 584 गांवों को कोई राशि नहीं मिली। उन्होंने दावा किया कि लेखा परीक्षण में ग्राम सभाओं की मंजूरी के बिना 1,730 परियोजनाएं शुरू किए जाने की बात भी सामने आयी।
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