हैदराबाद , अप्रैल 13 -- तेलंगाना राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष जी. निरंजन ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से महिला आरक्षण और जनगणना में पिछड़े वर्ग की महिलाओं के लिए न्याय सुनिश्चित करने की अपील की है। श्री निरंजन ने सोमवार को प्रधानमंत्री को लिखे एक पत्र में कहा कि जहां महिला आरक्षण एक ऐतिहासिक कदम है, वहीं पिछड़े वर्ग की महिलाओं के लिए विशेष प्रावधानों की कमी, जनसंख्या में उनकी महत्वपूर्ण हिस्सेदारी के बावजूद गंभीर चिंताएं पैदा करती हैं।
उन्होंने कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी और राज्य सभा तथा लोक सभा में विपक्ष के नेताओं सर्वश्री मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी को भी अलग-अलग पत्र लिखे और उनसे आगामी संसद सत्रों के दौरान इस मुद्दे को उठाने का अनुरोध किया।
श्री निरंजन ने बताया कि जहां अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं को आरक्षण दिया जा रहा है, वहीं पिछड़े वर्ग की महिलाओं को इससे बाहर रखना अन्याय होगा। उन्होंने जनगणना की कार्यप्रणाली पर भी चिंता व्यक्त की। यह देखते हुए कि जहां पहले चरण में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति का डेटा एकत्र किया जा रहा है, वहीं अन्य पिछड़ा वर्ग को छोड़ दिया जा रहा है, जिससे इस पूरी कवायद के इरादे पर संदेह पैदा होता है।
उन्होंने मांग की कि पिछड़े वर्ग की जातिगत गणना जनगणना के शुरुआती चरण से ही अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के साथ की जाये और दूसरे चरण में पिछड़े वर्ग की उप-जातियों की विस्तृत गणना की जाये।
श्री निरंजन ने जाति सूचियों में विसंगतियों को उजागर करते हुए कहा कि तेलंगाना की राज्य सूची में 130पिछड़ी जातियां हैं, जबकि केंद्रीय अन्य पिछड़ा वर्ग की सूची में केवल 90 जातियां शामिल हैं। इसके परिणामस्वरूप शेष 40 जातियों के सदस्य केंद्र सरकार की शिक्षा और रोजगार में आरक्षण का लाभ नहींउठा पा रहे हैं।
उन्होंने केंद्र से आग्रह किया कि 2027 की जनगणना से पहले केंद्रीय अन्य पिछड़ा वर्ग सूची में संशोधन करके इन जातियों को शामिल किया जाये। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसा न करने पर आधिकारिक डेटा में तेलंगाना के पिछड़ा वर्ग समुदाय का प्रतिनिधित्व कम हो सकता है।
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