भोपाल , जून 29 -- मध्यप्रदेश के होनहार बच्चों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से जोड़ने के उद्देश्य से प्रदेश के अभिभावकों, शिक्षकों, सामाजिक संस्थाओं, जनप्रतिनिधियों तथा जिला प्रशासन से अधिक से अधिक पात्र बच्चों के नामांकन भेजने का आह्वान मध्यप्रदेश बाल संरक्षण आयोग ने किया है।
मध्यप्रदेश बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार पांच से 18 वर्ष आयु वर्ग के उन बच्चों को प्रदान किया जाता है, जिन्होंने बहादुरी, समाज सेवा, पर्यावरण संरक्षण, खेल, कला एवं संस्कृति तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में असाधारण उपलब्धियां अर्जित की हैं। यह सम्मान प्रत्येक वर्ष 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस के अवसर पर प्रदान किया जाता है।
उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के गांवों, कस्बों और शहरों में अनेक प्रतिभाशाली बच्चे अपनी मेहनत, साहस और नवाचार से उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं, लेकिन जानकारी के अभाव में उनकी उपलब्धियां राष्ट्रीय स्तर तक नहीं पहुंच पाती हैं। ऐसे बच्चों की पहचान कर उनका समय पर नामांकन कराया जाना आवश्यक है।
डॉ. निवेदिता शर्मा के अनुसार वर्ष 2019 में पुरस्कार की नई व्यवस्था लागू होने के बाद से अब तक देशभर के 203 बच्चों को इस सम्मान से नवाजा जा चुका है। इनमें वैज्ञानिक नवाचार, पर्यावरण संरक्षण, समाज सेवा, खेल, कला और साहसिक कार्यों के लिए उल्लेखनीय योगदान देने वाले बच्चे शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि पुरस्कार के लिए माता-पिता, शिक्षक, सामाजिक संस्थाएं, जनप्रतिनिधि, जिला प्रशासन अथवा कोई भी जिम्मेदार नागरिक नामांकन कर सकता है। पात्र बच्चा स्वयं भी अपना नामांकन प्रस्तुत कर सकता है।
उन्होंने बताया कि आवेदक भारतीय नागरिक होना चाहिए तथा 31 जुलाई 2026 को उसकी आयु पांच से 18 वर्ष के बीच होनी चाहिए। उपलब्धि पिछले दो वर्षों के भीतर की हो तथा निर्धारित दस्तावेज, हाल का छायाचित्र और उपलब्धि का संक्षिप्त विवरण ऑनलाइन पोर्टल पर अंतिम तिथि से पहले अपलोड करना होगा।
डॉ. शर्मा ने प्रदेशवासियों से अपने आसपास के ऐसे प्रतिभाशाली बच्चों की पहचान कर उनका नामांकन कराने की अपील करते हुए कहा कि यह सम्मान बच्चों की प्रतिभा, साहस, संवेदनशीलता और नवाचार को राष्ट्रीय पहचान दिलाने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
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