वाराणसी , जून 10 -- सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि श्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश के सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में स्थापित की गई ऐतिहासिक उपलब्धि केवल एक राजनीतिक पड़ाव नहीं है, बल्कि यह भारतीय लोकतंत्र की शक्ति, जन-आस्था की दृढ़ता और राष्ट्र के विकास के प्रति जनता की प्रतिबद्धता का सशक्त प्रमाण है।

उन्होने कहा कि यह उपलब्धि विशेष रूप से काशीवासियों के लिए भी गौरव का विषय है, क्योंकि प्रधानमंत्री वर्ष 2014 से विश्व की प्राचीनतम जीवित नगरी काशी का लोकसभा में प्रतिनिधित्व करते हुए इसके सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और विकासात्मक पुनर्जागरण के प्रमुख संवाहक बने हैं। कुलपति ने कहा, " मैं एक शिक्षाविद् के रूप में प्रधानमंत्री को इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं अर्पित करता हूं। उनके नेतृत्व में भारत ने विकास, सुशासन, सांस्कृतिक आत्मविश्वास और वैश्विक प्रतिष्ठा के नए आयाम स्थापित किए हैं, जिन्होंने राष्ट्र के भविष्य को नई दिशा प्रदान की है।"प्रो. शर्मा ने कहा कि पिछले बारह वर्षों में भारत ने आर्थिक, तकनीकी, सामरिक और सामाजिक क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में भारत की सुदृढ़ उपस्थिति, डिजिटल क्रांति के माध्यम से प्रशासनिक पारदर्शिता, आधारभूत संरचना के अभूतपूर्व विस्तार, गरीब कल्याण योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा आत्मनिर्भर भारत के संकल्प ने देश को नई ऊर्जा और आत्मविश्वास प्रदान किया है। जनधन योजना, डिजिटल भुगतान प्रणाली, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण, स्टार्टअप इंडिया, मेक इन इंडिया और कौशल विकास जैसी पहलों ने करोड़ों नागरिकों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाया है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में भारत ने वैश्विक मंचों पर भी अपनी प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है। आज भारत केवल विश्व की एक बड़ी अर्थव्यवस्था ही नहीं, बल्कि मानवता, पर्यावरण, शांति और सतत विकास के मुद्दों पर नेतृत्वकारी भूमिका निभाने वाला राष्ट्र बनकर उभरा है। जी-20 की सफल अध्यक्षता तथा 'वसुधैव कुटुम्बकम्' की भारतीय अवधारणा को वैश्विक विमर्श के केंद्र में स्थापित करना इसकी महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल है।

काशी के सांसद के रूप में प्रधानमंत्री मोदी ने इस प्राचीन सांस्कृतिक नगरी के पुनरोत्थान में जो योगदान दिया है, वह अभूतपूर्व है। काशी विश्वनाथ धाम का भव्य पुनर्विकास, गंगा तटों का सौंदर्यीकरण, आधुनिक आधारभूत संरचना का विकास, पर्यटन और सांस्कृतिक गतिविधियों का विस्तार तथा नगरीय सुविधाओं के उन्नयन ने काशी को विश्वस्तरीय पहचान प्रदान की है। आज काशी एक ओर अपनी सनातन आध्यात्मिक विरासत को अक्षुण्ण बनाए रखते हुए है, तो दूसरी ओर आधुनिक विकास और नवाचार का भी सशक्त केंद्र बनकर उभरी है।

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