मुंबई , अगस्त 08 -- शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर राजनीतिक दलबदलुओं के साथ बंद कमरे में बैठकें करने के लिए समय निकालने और विरोध-प्रदर्शन कर रहे युवाओं की चिंताओं को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया।

वर्ष 2022 में शिवसेना से टूटकर अलग हुए और फरवरी 2023 में चुनाव आयोग से असली 'शिवसेना' की मान्यता पाने वाले गुट के सांसदों को प्रधानमंत्री के दिये गये आश्वासनों पर सवाल उठाते हुए श्री ठाकरे ने पूछा कि क्या ऐसे बयानों को उच्चतम न्यायालय के लिए एक अप्रत्यक्ष संदेश या चेतावनी माना जा सकता है, जहां राजनीतिक दलबदल से जुड़े अयोग्यता के महत्वपूर्ण मामले लंबित हैं।

बागी गुट के सांसदों और प्रधानमंत्री मोदी के बीच हुई बैठक का जिक्र करते हुए श्री ठाकरे ने कहा, "प्रधानमंत्री के पास देश के युवाओं और छात्रों से मिलने का समय नहीं है, लेकिन दलबदलुओं के लिए उनके पास पूरा समय है।" बंद कमरे में हुई बैठक की सार्वजनिक हुई बातों सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि 'डरने की ज़रूरत नहीं है, खुद प्रधानमंत्री आपके पीछे खड़े हैं' जैसा आश्वासन सामने आना एक खतरनाक मिसाल है।

श्री ठाकरे ने छात्र प्रदर्शनों से निपटने के सरकारी तरीके और प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कार्रवाई की भी आलोचना की। लाठीचार्ज के इस्तेमाल को लेकर उन्होंने इसकी तुलना जालियांवाला बाग हत्याकांड से की। उन्होंने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री ने प्रदर्शनकारी छात्रों से मुलाकात क्यों नहीं की? साथ ही आरोप लगाया कि शासन-व्यवस्था अब देर रात इंस्टाग्राम पर वीडियो पोस्ट करने तक सीमित होकर रह गयी है।

राजनीतिक दलबदल पर जारी कानूनी लड़ाई का जिक्र करते हुए श्री ठाकरे ने कहा कि 'गद्दारी का वायरस' भारतीय लोकतंत्र का गला घोंट रहा है। उन्होंने सवाल किया कि क्या बागी विधायकों को प्रधानमंत्री का समर्थन उच्चतम न्यायालय को कोई संदेश देने जैसा नहीं है?शिवसेना के दोनों परस्पर विरोधी गुटों से जुड़ी चार वर्ष पुरानी अयोग्यता कार्यवाही पर सीधे टिप्पणी से बचते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इस मामले का फैसला पूरी तरह संविधान के दायरे में रहकर किया जायेगा।

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