ईटानगर , अगस्त 02 -- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के वर्चुअली शुरू किये गये देशव्यापी 'नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान' में भाग लेते हुए अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) केटी परनाइक ने रविवार को नशीली दवाओं के दुरुपयोग के खिलाफ एक निरंतर और जन-संचालित अभियान चलाने का आह्वान किया।
राज्यपाल ने यहां लोक भवन से प्रधानमंत्री के 100 सप्ताह के देशव्यापी जन भागीदारी अभियान का शुभारंभ करते हुए इस वर्चुअल बातचीत में अरुणाचल प्रदेश के शैक्षणिक संस्थानों और युवा केंद्रों सहित देशभर के 10,000 से अधिक स्थानों से एक करोड़ से अधिक युवाओं को संबोधित किया गया।
इस अभियान का उद्देश्य मादक पदार्थों के सेवन के खिलाफ लड़ाई में युवाओं और समुदायों को एकजुट करना है और 'विकसित भारत 2047' के आवश्यक स्तंभ के रूप में नशा मुक्त भारत के दृष्टिकोण को बढ़ावा देना है।
राज्यपाल ने वर्चुअल कार्यक्रम के बाद अधिकारियों से चर्चा की और विशेष रूप से युवाओं के बीच जागरूकता फैलाने एवं सक्रिय जनभागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए पूरे राज्य में अगले 100 दिनों तक हर रविवार को 'नशा मुक्त नुक्कड़ कार्यक्रम' आयोजित करने का प्रस्ताव रखा।नशीली दवाओं के खिलाफ लड़ाई को जमीनी स्तर से शुरू करने पर जोर देते हुए राज्यपाल ने 'पता लगायें-सलाह दें-रोकें-कौशल' दृष्टिकोण की वकालत की।उन्होंने गांव बूड़ाओं (गांव प्रधानों), समुदाय के बुजुर्गों और पंचायत नेताओं से लती युवाओं की पहचान करने, प्रभावित परिवारों को परामर्श देने और गांवों में नशीली दवाओं के दुरुपयोग को रोकने के लिए सामूहिक रूप से काम करने का आग्रह किया। सर्किल स्तर पर, उन्होंने पुनर्वास और सुधार संबंधी पहलों में स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को शामिल करने की सिफारिश की।
उन्होंने सुझाव दिया कि नशा मुक्त हो चुके व्यक्तियों को 'एडीए - नशा के खिलाफ राजदूत' के रूप में नामित किया जाये, ताकि दूसरों को नशे से उबरने और स्वस्थ जीवन जीने के लिए प्रेरित किया जा सके। श्री परनाइक ने कहा कि कौशल विकास, रोजगार के अवसर और खेल एवं युवा गतिविधियों में अधिक भागीदारी नशीली दवाओं के दुरुपयोग को रोकने के सबसे प्रभावी तरीकों में से हैं।
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