गरियाबंद , मार्च 11 -- छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में स्थित नगर पंचायत कोपरा में प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर अज़ब-गजब गड़बड़ी होने का मामला तीन माह बाद भी सुलझ नहीं पाया है। एक तरफ जहां पात्र होने के बावजूद 12 हितग्राही आज भी योजना के लाभ से वंचित हैं। वहीं दूसरी ओर प्रशासन समस्या के समाधान के लिए भारत सरकार के राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र को पत्र लिखने की बात कहकर अपनी जिम्मेदारी निभाने का ढिंढोरा पीट रहा है, जबकि जमीनी स्तर पर अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है।
दरअसल, नगर पंचायत कोपरा के कई हितग्राहियों के नाम प्रधानमंत्री आवास योजना की सूची में पहले से लाभ प्राप्त हितग्राही के रूप में दर्ज कर दिए गए हैं। शासन के अभिलेखों में उनके नाम पर पक्का मकान बन जाने और राशि जारी होने का उल्लेख है, जबकि वास्तविकता यह है कि इन लोगों को आज तक आवास नहीं मिला है।
पीड़ित हितग्राहियों ने पिछले साल नौ दिसंबर को कलेक्टर जनदर्शन में आवेदन देकर पूरे मामले की शिकायत की थी। शिकायत के बाद हुई जांच में भी यह स्पष्ट हुआ कि संबंधित हितग्राहियों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिला है। इसके बावजूद तीन माह बीत जाने के बाद भी विभागीय अभिलेखों से उनके नाम नहीं हटाए गए हैं।
नगर पंचायत कोपरा में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी 2.0) के तहत अन्य लोगों को आवास स्वीकृत किए जा रहे हैं। वहीं सर्वे सूची में पहले स्थान पर होने के बावजूद ये पात्र हितग्राही योजना से वंचित हैं। हितग्राहियों का आरोप है कि विभागीय लापरवाही और तकनीकी त्रुटि के कारण उन्हें लगातार परेशान होना पड़ रहा है।
शासन के दस्तावेजों में इन हितग्राहियों के नाम पर पक्का मकान बन जाने और राशि जारी होने का उल्लेख है लेकिन यह मकान कहां बना और किसके द्वारा राशि निकाली गई, इसकी जानकारी तक हितग्राहियों को नहीं है।
बताया जाता है कि जनपद पंचायत फिंगेश्वर में दर्ज अभिलेखों के अनुसार कुछ हितग्राहियों के नाम पर योजना की राशि भी जारी की जा चुकी है। जब हितग्राहियों ने इस संबंध में जानकारी मांगी तो अधिकारी यह स्पष्ट नहीं कर पाए कि राशि किसने निकाली और किस खाते में स्थानांतरित की गई।
शासन के अभिलेखों में होरीलाल चक्रधारी, कमलराम साहू, सुदर्शनलाल, महेंद्र कुमार साहू, दुश्यंत साहू, अशोक कुमार पटेल, धनीराम साहू, गोपाल साहू, प्रकाश निषाद, रामसाय निषाद, मिथलेश कुमार, जीवनलाल साहू और नीरज यादव के नाम पर प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दर्ज है।
झोपड़ी में रहने को मजबूर पीड़ितों का कहना है कि वे आज भी झोपड़ी और खपरैल के कच्चे मकानों में रहने को मजबूर हैं। उनका आरोप है कि विभागीय त्रुटि या किसी गड़बड़ी के कारण उन्हें योजना से वंचित कर दिया गया है।
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