महिपाल सिंह सेअमरोहा, मई 30 -- दुनिया भर में 'लंगड़ा' और 'चौंसा आम की मिठास के लिए मशहूर अमरोहा जिले के फल निर्यातकों और बागवानों के लिए इस साल की शुरुआत दोहरी चुनौतियों के साथ हुई है। एक ओर कुदरत के तल्ख मिजाज ने पैदावार को प्रभावित किया है, वहीं करीब दो दशकों के लंबे अंतराल के बाद जापान द्वारा भारतीय आमों की एंट्री पर लगाई गई रोक ने बागवानो के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। भारी बौर आने के बाद उम्मीद जताई जा रही थी कि इस बार बंपर पैदावार से आम आदमी को राहत मिलेगी, लेकिन पहले आंधी और अब वैश्विक व्यापारिक अड़चनों ने आम की मिठास पर संकट के बादल मंडरा दिए हैं।

अमरोहा जिले में लगभग 12 हजार हेक्टेयर में फैले आम के बागों से हर साल भारी मात्रा में फल खाड़ी देशों, अमेरिका, जापान और यूरोप को निर्यात किया जाता है। जिला उद्यान आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार पिछले साल यहां 2,05,560 मीट्रिक टन पैदावार हुई थी, जिसमें इस वर्ष 10 प्रतिशत बढ़ोतरी का अनुमान था मगर हाल ही में तेज रफ्तार आंधी ने पैदावार को भारी क्षति पहुँचाई है। इसके साथ ही जापान सरकार ने कीट नियंत्रण में कमी और 'वेपर हीट ट्रीटमेंट' (वीएचटी) मानकों पर खरा न उतरने का हवाला देते हुए 25 मार्च 2026 के बाद जारी सर्टिफिकेट वाली खेप पर रोक लगा दी है। जापान की इस कीट नियंत्रण 'जीरो टॉलरेंस' नीति ने स्थानीय निर्यातकों की धड़कनें बढ़ा दी हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि यदि यूरोपीय संघ और अन्य विकसित देशों ने भी गुणवत्ता पर ऐसे ही कड़े सवाल उठाए, तो अमरोहा का बड़ा निर्यात कारोबार को झटका लग सकता है।

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