हैदराबाद , मई 13 -- वैज्ञानिकों ने एक ऐसी प्राकृतिक प्रणाली की खोज की है, जिसके जरिए पौधे खुद को हानिकारक विषाणुओं से बचाते हैं। इस प्रणाली के तहत पौधे किसी भी बाहरी विषाणु के हमले को रोकने के लिए प्रोटीन की चिपचिपी और गाढ़ी बूंदों का इस्तेमाल करते हैं, जो एक जाल की तरह काम करती हैं।सीएसआईआर-कोशिकीय एवं आणविक जीवविज्ञान केंद्र के तत्वावधान में तथा डॉ. मंदार वी देशमुख के नेतृत्व में हुए इस शोध से पता चला है कि जब कोई विषाणु पौधों पर हमला करता है, तो पौधे विशेष प्रकार के प्रोटीन का निर्माण करते हैं। ये प्रोटीन विषाणु के आनुवंशिक तत्वों को पहचानकर उनसे चिपक जाते हैं, जिससे विषाणु पौधे की कोशिकाओं के अंदर अपनी संख्या बढ़ा नहीं पाते और संक्रमण वहीं रुक जाता है।वैज्ञानिकों ने आधुनिक तकनीकों के जरिए पाया कि ये प्रोटीन आपस में जुड़कर किसी गोंद की तरह एक घना घेरा बना लेते हैं। शोध पत्र के मुख्य लेखक डॉ. जयदीप पॉल ने बताया कि ये चिपचिपी बूंदें विषाणु को पूरी तरह जकड़ लेती हैं, जिससे उसे फैलने का मौका नहीं मिलता।

इस खोज का महत्व समझाते हुए डॉ. देशमुख ने कहा कि अब तक कोशिकाओं को केवल स्थिर अंगों के रूप में देखा जाता था, लेकिन वास्तव में वे बहुत सक्रिय होती हैं। यह जानकारी भविष्य में ऐसी फसलें तैयार करने में मदद करेगी, जो प्राकृतिक रूप से बीमारियों से लड़ने में सक्षम हों। इससे खेती में होने वाले भारी नुकसान को कम किया जा सकेगा।

इतना ही नहीं, वैज्ञानिकों का मानना है कि इस तकनीक का फायदा इंसानों के इलाज में भी मिल सकता है। इसकी मदद से दिमाग की बीमारियों में जमने वाले जहरीले प्रोटीन के गुच्छों को खत्म करने या कैंसर की गांठों के सुरक्षा कवच को तोड़ने के लिए नयी दवाइयां बनाई जा सकती हैं। यह शोध कृषि और चिकित्सा विज्ञान, दोनों के लिए नयी उम्मीदें लेकर आया है।

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