रायपुर , अगस्त 25 -- भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर)-राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान (एनआईबीएसएम), रायपुर की ओर से घरेलू पोषण सुरक्षा, आहार विविधता और सुरक्षित खाद्य उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मंगलवार को 'पोषण वाटिका' विषय पर एक दिवसीय क्षमता निर्माण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में बरोंदा, मुर्रा, बेलटुकरी, देवगांव, कुर्रा और कथुरड गांवों के कुल 62 किसानों ने हिस्सा लिया, जिनमें 10 महिला किसान भी शामिल थीं।
संस्थान के निदेशक डॉ. पी. के. राय ने कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए कहा कि परिवार के बेहतर स्वास्थ्य के लिए घर पर ताजी, पौष्टिक और रसायन मुक्त सब्जियों एवं फलों की उपलब्धता जरूरी है। उन्होंने कहा कि पर्याप्त भूमि नहीं होने की स्थिति में आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से भी पोषण वाटिका विकसित की जा सकती है। इससे सामुदायिक स्तर पर कुपोषण दूर करने में मदद मिल सकती है।
संयुक्त निदेशक एवं कार्यक्रम समन्वयक डॉ. पंकज शर्मा ने किसानों को स्थानीय जलवायु के अनुरूप पोषण वाटिका के प्रबंधन की व्यावहारिक जानकारी दी। उन्होंने कम बारिश की स्थिति में उचित आकार के गड्ढे तैयार कर उनमें सड़ी हुई गोबर खाद मिलाकर फलदार पौधे लगाने, जलभराव से बचने के लिए समुचित जल निकासी की व्यवस्था करने तथा अधिक नमी वाले क्षेत्रों में सब्जियों के लिए ऊंची क्यारियां तैयार करने की सलाह दी।
उन्होंने किसानों से अनावश्यक रासायनिक कीटनाशकों के प्रयोग से बचने और पारंपरिक एवं पर्यावरण-अनुकूल जैविक उपाय अपनाने का आह्वान किया।
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