पटना , अप्रैल 24 -- बिहार के उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने शुक्रवार को कहा कि पोषण पखवाड़ा बिहार में अब एक जन आंदोलन का रूप ले चुका है, जो ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के परिवारों तक पहुंच रहा है।
प्रारंभिक बाल विकास को सुदृढ़ करने तथा विकासात्मक विलंब की समय पर पहचान सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, बिहार सरकार के समाज कल्याण विभाग अंतर्गत आईसीडीएस निदेशालय ने यूनिसेफ के तकनीकी सहयोग से आज पटना स्थित ज्ञान भवन में आयोजित राज्य स्तरीय पोषण पखवाड़ा कार्यशाला में दिव्यांगता स्क्रीनिंग के लिये मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) एवं दिशा-निर्देशों का शुभारंभ किया। यह कार्यशाला पोषण पखवाड़ा 2026 के समापन का भी प्रतीक बनी।
यह कार्यशाला इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि उपलब्ध साक्ष्यों के अनुसार एक बच्चे के मस्तिष्क का लगभग 85 प्रतिशत विकास छह वर्ष की आयु से पहले ही हो जाता है, लेकिन बड़ी संख्या में विकासात्मक विलंब से ग्रस्त बच्चों की पहचान स्कूल जाने की उम्र तक नहीं हो पाती।
उपमुख्यमंत्री श्री यादव ने समारोह को संबोधित करते हुए समावेशी विकास के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पोषण पखवाड़ा बिहार में अब एक जन आंदोलन का रूप ले चुका है, जो ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के परिवारों तक पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि यूनिसेफ के निरंतर तकनीकी सहयोग से राज्य में प्रारंभिक बाल विकास प्रणाली को मजबूत किया जा रहा है,जिसमें पोषण सुधार से लेकर विकासात्मक विलंब की समय पर पहचान सुनिश्चित करना शामिल है। उन्होंने कहा कि दिव्यांगता स्क्रीनिंग ढांचे की शुरुआत एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि हर बच्चे, विशेषकर विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चों की समय पर पहचान हो और उन्हें उचित देखभाल मिल सके।उन्होंने ज़ोर दिया कि राज्य का लक्ष्य है कि बिहार के विकास की यात्रा में कोई भी बच्चा पीछे नहीं छूटे।
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