पटना, जुलाई 21 -- ेश में कुपोषण से जुड़े मुद्दों पर वैज्ञानिक शोध को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) पटना ने मंगलवार को न्यूट्रीशन रीसर्च कोर्स टू ट्रांसलेट एंड युटिलाइज रीसर्च(नर्चर)रीजनल ट्रेनिंग कैप्सूल, बिहार' का शुभारंभ किया। इस तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य स्वास्थ्यकर्मियों, शोधकर्ताओं, शिक्षकों और जनस्वास्थ्य विशेषज्ञों को पोषण अनुसंधान की आधुनिक तकनीकों से प्रशिक्षित करना तथा साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को बढ़ावा देना है।

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 21 से 23 जुलाई, 2026 तक एम्स पटना के सामुदायिक एवं पारिवारिक चिकित्सा विभाग द्वारा डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (आरपीसीएयू), पूसा, सेंट जॉन्स रिसर्च इंस्टीट्यूट, बेंगलुरु तथा यूनिसेफ के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।

कार्यक्रम का उद्घाटन एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल ने किया। इस अवसर पर डीन (एकेडमिक्स) प्रो. (डॉ.) पूनम प्रसाद भदानी, चिकित्सा अधीक्षक प्रो. (डॉ.) प्रशांत कुमार सिंह, आरपीसीएयू की डीन प्रो. (डॉ.) उषा सिंह, सेंट जॉन्स रिसर्च इंस्टीट्यूट की प्रो. (डॉ.) रेबेका कुरियन राज, यूनिसेफ बिहार के न्यूट्रिशन स्पेशलिस्ट डॉ. अंतर्यामी दास, गेट्स फाउंडेशन इंडिया की न्यूट्रिशन लीड डॉ. रुचिका चुघ सचदेवा सहित देशभर से आए चिकित्सक, शोधकर्ता और जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ उपस्थित थे।

स्वागत संबोधन में एम्स पटना के सामुदायिक एवं पारिवारिक चिकित्सा विभागाध्यक्ष एवं डीन (रिसर्च) प्रो. (डॉ.) संजय पांडेय ने कहा कि एनएफएचएस-6 के ताज़ा आंकड़ों में बच्चों के पोषण से जुड़े कई संकेतकों में सुधार दिखाई देता है लेकिन कुपोषण अभी भी देश के सामने एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि पोषण कार्यक्रमों को मजबूत शोध और स्थानीय आवश्यकताओं पर आधारित वैज्ञानिक साक्ष्यों के साथ आगे बढ़ाया जाए।

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