दरभंगा , मई 12 -- ्रख्यात रसायनशास्त्री डॉ. विवेकानन्द झा ने मंगलवार को कहा कि पॉलीमर आधुनिक मानव जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। श्री झा ने ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर रसायनशास्त्र विभाग एवं डॉ. प्रभात दास फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार "पॉलीमर : कल, आज और कल" को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में पॉलीमर के बिना आधुनिक जीवन की कल्पना संभव नहीं है, लेकिन आने वाला समय स्मार्ट पॉलीमर का होगा, जो पुनः उपयोग योग्य, बायोडिग्रेडेबल और पर्यावरण के लिए कम हानिकारक साबित होगा।
श्री झा ने कहा कि छोटे-छोटे अणुओं के आपस में जुड़ने से बनने वाला पॉलीमर मानव जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है।
मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. विवेकानन्द झा ने पॉलीमर के इतिहास, प्रकार, उपयोगिता और उसके दुरुपयोग पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि यदि पॉलीमर का विवेकपूर्ण और नियंत्रित उपयोग किया जाए तो यह मानव जीवन के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो सकता है और स्मार्ट पॉलीमर से हमारा भविष्य भी उज्ज्वल होगा। उन्होंने बताया कि 19वीं सदी में विकसित पॉलीमर का प्रयोग द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद तेजी से बढ़ा और आज यह विज्ञान एवं उद्योग का महत्वपूर्ण आधार बन चुका है।
श्री झा ने नैनो पॉलीमर और स्मार्ट पॉलीमर की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस क्षेत्र में छात्र-छात्राओं के लिए रोजगार और शोध की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।
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