नैनीताल , मार्च 19 -- उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय ने नाबालिग से छेड़छाड़ और पॉक्सो अधिनियम से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए आरोपी को बइज्जत बरी कर दिया है।
न्यायमूर्ति आशीष नैथानी की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई के बाद आरोपी महेश सिंह की सजा रद्द करते हुए कहा कि केवल पूर्व बयानों के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, जब तक अदालत में दिए गए बयान स्पष्ट और ठोस न हों।
मामला चम्पावत जिले के रीठा साहिब थाना क्षेत्र का है। फरवरी 2024 में दर्ज रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी पर 17 वर्षीय किशोरी से छेड़छाड़ और उसे झाड़ियों की ओर ले जाने का आरोप लगाया गया था। इस आधार पर पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की थी और निचली अदालत ने आरोपी को चार वर्ष के कारावास की सजा सुनाई थी।
हाईकोर्ट ने पाया कि पीड़िता के बयान में विरोधाभास है। निचली अदालत में दिए गए मुख्य बयान में पीड़िता ने केवल गाली-गलौज और Rs.500 का नोट फेंकने की बात कही जबकि छेड़छाड़ या यौन हमले का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया।
कोर्ट ने कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 164 के तहत दर्ज बयान स्वयं में ठोस साक्ष्य नहीं होते, बल्कि उनका उपयोग केवल पुष्टि या विरोधाभास दिखाने के लिए किया जा सकता है।
साथ ही, घटना दिनदहाड़े होने के बावजूद पुलिस कोई स्वतंत्र गवाह पेश नहीं कर सकी। झाड़ियों से Rs.500 का नोट बरामद होना भी आरोप सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं माना गया।
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