श्रीनगर , अक्टूबर 24 -- वापसी की उड़ान रद्द होने के कारण 36 कश्मीरी उमरा यात्री सऊदी अरब में फंसे हुए हैं जिनमें बुजुर्ग और महिलाएं भी शामिल हैं।

इन यात्रियों की वापसी की उड़ान 13 अक्टूबर को निर्धारित थी। उड़ानें रद्द होने से अब उन्हें रहने, खाने और दवाइयों का खर्च जुटाने में परेशानी हो रही है।

फंसे हुए यात्रियों ने कहा कि उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है कि उन्हें बेसहारा छोड़ दिया गया है। उन्होंने तत्काल सहायता की अपील की है, क्योंकि उनके पास उपलब्ध धन और जरूरी दवाइयां खत्म होने के करीब हैं।

पचास यात्रियों का यह समूह 25 सितंबर को श्रीनगर से रवाना हुआ था। इंडिगो की वापसी उड़ान रद्द होने के बाद इनमें से 36 यात्री घर नहीं लौट पा रहे हैं। यात्रियों ने बताया कि उड़ानों के समय में बार-बार बदलाव और हवाई किराये में भारी वृद्धि ने उनकी वापसी को और मुश्किल बना दिया है। भारतीय विमानन कंपनियां लगातार उड़ानों की तारीखें आगे बढ़ा रही हैं, जबकि अभी भी परिचालन कर रहीं कुछ स्थानीय विमानन कंपनियों का किराया उनकी पहुंच से बाहर है।

सऊदी अरब से अपनी परेशानी बताते हुए समूह के सदस्य वकार मीर ने कहा, "जेद्दा से दुबई, मस्कट या कुवैत के रास्ते घर लौटने का किराया प्रति व्यक्ति एक लाख रुपये से अधिक है।"महंगे टिकट खरीदने में असमर्थ 36 यात्री अभी भी सऊदी अरब में वापसी का इंतजार कर रहे हैं। वहीं, शेष 14 यात्रियों ने अपनी व्यवस्था से कुछ दिन पहले दुबई के रास्ते घर वापसी कर ली।

फंसे हुए यात्रियों ने बताया कि अब तक वे अपने रहने और खाने-पीने का खर्च खुद उठा रहे थे, लेकिन उनकी बचत लगभग खत्म हो चुकी है। उनमें से कई अब रोजमर्रा के खर्च पूरे करने के लिए साथी यात्रियों और अन्य लोगों से पैसे उधार ले रहे हैं।

श्री मीर ने कहा, "हम सभी अपने हाल पर छोड़ दिए गए हैं।" यात्रियों ने बताया कि समूह के कई सदस्यों की बिगड़ती आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी स्थिति उनकी चिंता का विषय है।

उन्होंने कहा कि कुछ बुजुर्ग यात्रियों की जरूरी दवाइयां खत्म होने वाली हैं। उन्होंने बताया कि सऊदी अरब में दवाइयां महंगी हैं और उन्हें खरीदने के लिए अक्सर वहां के स्थानीय डॉक्टरों के पर्चे की जरूरत होती है।

उन्होंने कहा, "सऊदी अरब में दवाइयां महंगी हैं और उन्हें खरीदने के लिए स्थानीय डॉक्टर का पर्चा जरूरी है। समूह के कुछ सदस्यों को चिंता और घबराहट के दौरे पड़े हैं, जबकि कुछ की मानसिक स्थिति बेहद खराब होने की कगार पर है।"सऊदी अरब में हूती हमलों के बाद पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया है। पिछले दो सप्ताह में रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर दो बार हमले हुए हैं, जिनमें भारतीय मूल के एक निवासी सहित दो लोगों की मौत हो गयी। श्री मीर के अनुसार, टूर ऑपरेटर ने उड़ान रद्द होने को 'दैवीय आपदा' बताते हुए कहा कि वह उनकी मदद करने में असमर्थ है।

समूह के एक सदस्य ने कहा, "जब हमने भारतीय दूतावास से संपर्क किया, तो हमें बताया गया कि टूर ऑपरेटर को यात्रियों की देखभाल करनी चाहिए।" अधिकारियों ने यात्रियों को टूर ऑपरेटर से संपर्क करने या सऊदी अरब की सऊदिया, फ्लाइनास अथवा एमिरेट्स जैसी विमानन कंपनियों से पड़ोसी देशों के रास्ते टिकट बुक कराने की सलाह दी है।

हवाई अड्डों की स्थिति ने भी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। यात्रियों के अनुसार, रियाद हवाई अड्डा पूरी तरह बंद है, जबकि जेद्दा हवाई अड्डे पर उड़ानें संचालित होने के बावजूद व्यवधान का सामना करना पड़ रहा है।

विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि रियाद स्थित भारतीय दूतावास और जेद्दा स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास फंसे हुए यात्रियों को जल्द घर वापस लाने के लिए विमानन कंपनियों और टूर ऑपरेटरों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।

मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि पिछले एक सप्ताह में सऊदी अरब में फंसे करीब 3,000 उमरा यात्री भारत लौट चुके हैं। इसके अलावा, उपलब्ध उड़ानों में टिकट बुक कराने वाले 10,000 से अधिक नियमित यात्री भी वापस आये हैं। उन्होंने कहा कि बाकी यात्रियों की वापसी के लिए व्यवस्थाओं पर चर्चा की जा रही है।

मंत्रालय ने बताया कि भारतीय दूतावास और वाणिज्य दूतावास स्थानीय समुदाय के स्वयंसेवकों की मदद से यात्रियों को आवश्यक सहायता उपलब्ध करा रहे हैं। भारतीय नागरिकों की मदद के लिए 24 घंटे संचालित होने वाले नियंत्रण कक्ष भी स्थापित किये गये हैं।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित