रांची , दिसंबर 24 -- झारखंड मुक्ति मोर्चा के महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने राज्य सरकार द्वारा पेसा नियमावली को स्वीकृति दिए जाने को एक ऐतिहासिक और दूरगामी निर्णय बताया है।

श्री भट्टाचार्य ने कहा कि यह फैसला मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार की मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति को दर्शाता है और इससे झारखंड के जनजातीयों व मूलवासियों की पारंपरिक जीवन शैली को नई मजबूती मिलेगी।

श्री भट्टाचार्य ने कहा कि पेसा नियमावली के लागू होने से आदिवासी समाज का स्वशासन, संस्कृति और परंपराएं सशक्त होंगी। यह केवल जनजातीय समाज के लिए ही नहीं, बल्कि झारखंड के जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा और सम्मान का भी प्रतीक है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस तरह भाजपा आदिवासी समाज को कमजोर करने की कोशिश करती रही है, उस परिस्थिति में पेसा नियमावली का लागू होना झारखंड के लिए एक अत्यंत सकारात्मक और सुखद कदम है।

श्री भट्टाचार्य ने कहा कि इससे पहले बाबूलाल मरांडी, अर्जुन मुंडा और रघुवर दास जैसे कई मुख्यमंत्री रहे, लेकिन उनके कार्यकाल में पेसा नियमावली को मंजूरी नहीं दी गई। पहले कार्यकाल में हेमंत सोरेन सरकार को लगातार परेशान किया गया, बावजूद इसके दूसरे कार्यकाल की शुरुआत होते ही पेसा नियमावली को स्वीकृति देना सरकार की प्राथमिकता को दर्शाता है।

श्री भट्टाचार्य ने कहा कि नियमावली लागू होने के बाद अब ग्राम सभा तय करेगी कि गांव की जरूरतें क्या हैं और विकास कैसे होगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अब एसी कमरों में बैठने वाले अधिकारी गांव का भविष्य तय नहीं करेंगे, बल्कि गांव के लोग स्वयं अपनी प्राथमिकताएं तय करेंगे और उनके कार्यान्वयन को सुनिश्चित करेंगे। उन्होंने इसे वास्तविक लोकतंत्र और स्वशासन की दिशा में बड़ा कदम बताया।

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