नैनीताल , सितम्बर 08 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने कुमाऊं मंडल में पेयजल की गुणवत्ता परखने के लिये एक राज्यस्तरीय लैब (प्रयोगशाला) खोलने के संदर्भ में जल संस्थान की ओर से भेजे गये प्रस्ताव पर चार सप्ताह में निर्णय लेने के निर्देश दिये हैं।
वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने ये निर्देश मंगलवार को नैनीताल से सटे ज्योलिकोट क्षेत्र में दूषित पेयजल के चलते फैले संक्रमण को लेकर दायर रवि जोशी की जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद दिये।
जिलाधिकारी (डीएम) ललित मोहन रयाल, मुख्य चिकित्साधिकारी डाॅ. रश्मि पंत, जल संस्थान और जल निगम के अधिकारी आज व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश हुए। डीएम की ओर से कहा गया कि ग्रामीणों की सुरक्षा के लिये उचित कदम उठाये जा रहे हैं। 267 ग्रामीण उपचाराधीन हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि ग्रामीणों के स्वास्थ्य की जांच के लिये जिला प्रशासन की ओर से चार लाख रुपये का फंड उपलब्ध कराया गया है। आवश्यकता पड़ने पर और धन उपलब्ध कराया जायेगा। डाॅ. पंत की ओर से कहा गया कि सभी एहतियाती कदम उठाये जा रहे हैं। दूसरी ओर पेयजल संस्थान और पेयजल निगम की ओर से कहा गया कि संक्रमण दूर करने के लिये विभाग की ओर से सभी प्रयास किये जा रहे हैं। हालांकि अधिकारी अदालत को यह बताने में अक्षम रहे कि गांवों में संक्रमण कैसे फैला है।
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत से मांग की गयी कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) पेयजल की जांच करने के निर्देश दिये जायें जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया और पीसीबी को छह से अधिक नमूनों की जांच कर एक सप्ताह में रिपोर्ट अदालत में सौंपने के निर्देश दिये।
इसी दौरान पेयजल संस्थान के अधिशासी अभियंता अमीश पिल्लई की ओर से अदालत को बताया गया कि कुमाऊं में पेयजल की गुणवत्ता परखने के लिये एक लैब की आवश्यकता है और संस्थान की ओर से वर्ष 2022 और 15 जनवरी 2026 को इसी संदर्भ में प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। उस पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित