मुंबई , अगस्त 28 -- कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण का मानना है कि सोशल मीडिया के ज़रिए 'जेन जी' जिस तरह से एकजुट हुआ है, उसने सत्ताधारी व्यवस्था को चौंका कर रख दिया है।

श्री चव्हाण पेपर लीक विरोधी कानून को नाकाफी मानते हैं और कहते हैं कि "कामकाज के तरीके में बुनियादी सुधार" की ज़रूरत है। वह मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की भी यह कहते हुए आलोचना करते हैं कि उन पर कई अहम विभागों का बोझ है और उनका "राजनीतिक ध्यान हमेशा दिल्ली पर ही रहता है"।

श्री चव्हाण ने यूनीवार्ता के साथ बातचीत में इसके अलावा 'जेन जी' की बढ़ती सक्रियता और अमेरिका की एपस्टीन फाइलों से जुड़ी सनसनीखेज घटनाओं पर भी खुलकर बात की। उन्होंने नीट सहित दूसरी परीक्षाओं में पेपर लीक और शिक्षा में कथित गड़बड़ियों पर कहा कि असल समस्या यह है कि पेपर लीक और परीक्षा में धोखाधड़ी करने वालों के लिए जोखिम और फायदे का अनुपात पूरी तरह से उनके पक्ष में हो गया है। क्योंकि दोषियों के मुकदमों में देरी होती है और उन्हें शायद ही कभी तुरंत या कड़ी सज़ा मिलती है, इसलिए अपराधी बेखौफ होकर काम करते हैं। पेपर माफिया, दलालों और प्राइवेट कोचिंग सेंटरों के बीच की मिलीभगत एक करोड़ों रुपये के गैर-कानूनी धंधे में बदल गई है। सिर्फ कागज़ पर नए और कड़े कानून बनाने से यह ठीक नहीं होगा; हमें सिस्टम में बुनियादी सुधार की ज़रूरत है। इसके अलावा, केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय को पार्ट-टाइम नौकरी की तरह नहीं चलाया जा सकता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक फुल-टाइम शिक्षा मंत्री की ज़रूरत है एक ऐसी राष्ट्रीय हस्ती जो युवा छात्रों में भरोसा जगा सके और शिक्षा के लिए बहुत बड़ा बजट हासिल करने के लिए कैबिनेट से लड़ सके।

श्री चव्हाण ने जेन जी आंदोलन पर अपनी राय जाहिर करते हुए कहा कि यह कुछ समय के लिए हुआ गुस्सा नहीं था, और न ही यह किसी एक जाति, धर्म या इलाके तक सीमित था। यह देश के जेन जी युवाओं की अगुवाई में हुआ एक स्वतःस्फूर्त और ज़बरदस्त आंदोलन था। किसान और मज़दूर परिवारों के लोग सिर्फ़ इसलिए अपनी ज़मीन बेच देते हैं या घर का सोना गिरवी रख देते हैं ताकि वे प्राइवेट कोचिंग सेंटरों की भारी-भरकम फ़ीस भर सकें और उन्हें उम्मीद होती है कि उनके बच्चों का भविष्य सुरक्षित होगा। इसलिए, पेपर लीक सिर्फ़ परीक्षा से जुड़ा मुद्दा नहीं है; यह रोज़गार और युवाओं की ज़िंदगी के लिए एक बड़ा खतरा है। जब छात्रों ने दिल्ली में शांतिपूर्ण विरोध किया, तो उन पर लाठीचार्ज किया गया। जब विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने संसद में यह अहम मुद्दा उठाया, तो सरकार ने सीधे तौर पर ज़िम्मेदारी लेने से किनारा कर लिया, जबकि दिल्ली में कानून-व्यवस्था सीधे केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आती है। जिस तरह से इन युवा नागरिकों ने सोशल मीडिया का इस्तेमाल करके एकजुटता दिखाई, उसने सत्ताधारी व्यवस्था को चौंका कर रख दिया है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी का नेतृत्व और भविष्य के राजनीतिक समीकरण पर अपने विचार प्रकट करते हुए कहा कि श्री गांधी के नेतृत्व के तरीके में एक बड़ा बदलाव आया है। 'छात्रों की गूंज' जैसी पहलों के ज़रिए वे ज़मीनी स्तर पर छात्रों, युवाओं और आम नागरिकों से सीधे जुड़ रहे हैं। वे विपक्ष के नेता के तौर पर अपनी ज़िम्मेदारी बहुत हिम्मत और स्पष्टता के साथ निभा रहे हैं। भविष्य की बात करें तो महाराष्ट्र में महा विकास अघाड़ी और राष्ट्रीय स्तर पर इंडिया गठबंधन बहुत मज़बूत स्थिति में हैं। हाल के चुनावी रुझान और विधानसभा चुनावों की स्थिति दिखाती है कि देश भर में राजनीतिक माहौल सत्ताधारी गठबंधन के खिलाफ़ जा रहा है।

उन्होंने एपस्टीन फाइल्स और उसके वैश्विक राजनीति पर असर पर चर्चा करते हुए कहा कि अमेरिकी कांग्रेस के पारदर्शिता कानूनों के तहत, जेफरी एपस्टीन से जुड़े लाखों दस्तावेज़, ईमेल और डिजिटल रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जा रहे हैं। यह सिर्फ़ अमेरिका का मामला नहीं है; अंतरराष्ट्रीय पत्रकार और कानूनी संस्थाएं इन फाइलों की जांच-पड़ताल कर रही हैं। अगर बच्चों के शोषण, गैर-कानूनी लॉबिंग या अंतरराष्ट्रीय हस्तियों के साथ तस्करी के लिंक के सबूत मिलते हैं, तो इसके गंभीर कानूनी और नैतिक नतीजे होंगे। दुनिया भर में बड़े राजनीतिक बदलाव हो रहे हैं और अहम चुनाव भी आने वाले हैं, ऐसे में इन फाइलों से होने वाले खुलासे निश्चित रूप से वैश्विक राजनीति में हलचल मचा देंगे और भारतीय राजनीति भी इससे अछूती नहीं रहेगी। इसके अलावा, महाराष्ट्र में पार्टी के बंटवारे और कामकाज को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई को देखते हुए, हम बड़े राजनीतिक बदलावों की कगार पर हैं।

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