दुर्ग , अगस्त 23 -- छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पेपर लीक, स्कूलों की स्थिति, शिक्षक भर्ती और महंगाई के मुद्दे पर राज्य की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि केवल कानून कड़ा करने से पेपर लीक की घटनाओं पर अंकुश नहीं लगेगा, बल्कि इसके लिए पूरी व्यवस्था में बदलाव करना होगा।

भिलाई के रिसाली में एक निजी कार्यक्रम में शनिवार देर रात शामिल होने पहुंचे पूर्व सीएम बघेल ने पत्रकारों से चर्चा में पेपर लीक के मुद्दे पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के 'गूंज' कार्यक्रम का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि पेपर लीक करने वालों में कानून का डर इसलिए नहीं है, क्योंकि व्यवस्था में ही कई स्तर पर गड़बड़ी है। छत्तीसगढ़ में लगातार पेपर लीक के मामले सामने आ रहे हैं।

उन्होंने हाल में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की परीक्षा से जुड़े पेपर लीक प्रकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि जांच में प्रश्नपत्र के करीब 70 प्रतिशत सवाल लीक हुए पेपर से मिलने की बात सामने आई, जिसके बाद परीक्षा रद्द करनी पड़ी।

श्री बघेल ने कहा कि ऐसी घटनाओं का सबसे अधिक नुकसान उन युवाओं को होता है, जो महीनों तक परीक्षा की तैयारी करते हैं। पेपर लीक से केवल परीक्षा प्रभावित नहीं होती, बल्कि हजारों युवाओं का समय, पैसा और भविष्य दांव पर लग जाता है। उन्होंने कहा कि सरकार को प्रश्नपत्र तैयार होने से लेकर उसके परीक्षा केंद्र तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया में ऐसी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए, जिसमें किसी स्तर पर चूक की गुंजाइश न रहे।

पूर्व मुख्यमंत्री ने स्कूलों की स्थिति को लेकर कहा कि उनकी सरकार ने स्कूल भवनों की मरम्मत और सुधार के लिए करीब 1800 करोड़ रुपये मंजूर किए थे तथा करीब 1100 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके थे। इसके तहत पुराने भवनों की मरम्मत, नए कमरों के निर्माण, रंग-रोगन और अन्य आवश्यक सुविधाओं से जुड़े कार्य किए जा रहे थे। उन्होंने दावा किया कि सत्ता परिवर्तन के बाद शेष राशि से होने वाले कार्य रोक दिए गए। पूर्व सीएम बघेल ने हालिया बयान में इस मद में करीब 1807 करोड़ रुपये के प्रावधान और करीब 1191 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की बात भी कही है।

श्री बघेल ने 'जेन अल्फा' के आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि दुर्ग, राजनांदगांव, खैरागढ़, कवर्धा और सक्ती सहित विभिन्न जिलों में बच्चे और युवा स्कूलों की स्थिति तथा शिक्षकों की कमी को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि जिन स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक और ठीक भवन नहीं होंगे, वहां बच्चों को बेहतर शिक्षा का माहौल कैसे मिलेगा। उन्होंने कहा कि बच्चों को अब अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर बैठना पड़ रहा है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित