नयी दिल्ली , जुलाई 30 -- पेपर लीक से संंबंधित विधेयक पर राज्यसभा में गुरुवार को सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई और जहां विपक्ष ने इसे निर्थरक प्रयास बताते हुए कहा कि इससे समस्या का समाधान नहीं होने वाला वहीं सत्ता पक्ष ने कहा कि विधेयक में ऐसे सख्त और पुख्ता प्रावधान किये गये हैं जिनसे पेपर लीक की समस्या पर अंकुश लगेगा।

पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई की निंदा करते हुए विपक्ष के सदस्यों ने गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की भी मांग की। द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) ने मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश की परीक्षा नीट को समाप्त किये जाने की मांग की।

तृणमूल कांग्रेस की सागरिका घोष ने लोक परीक्षा अनुचित साधन निवारण संशोधन विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि यह विधेयक समस्या का समाधान नहीं करता और इसमें केवल सजा का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि जब भी कोई परीक्षा लीक होती है और उसे रद्द किया जाता है तो यह सरकार की विफलता होती है और इससे छात्रों के साथ बड़ा धोखा होता है। उन्होंने तंज किया कि सरकार छात्रों की बात नहीं सुनती और वह केवल 'मन की बात' सुनती है।

सदस्य ने कहा कि नीट परीक्षा लीक होने से लाखों छात्रों और उनके माता पिता का सपना टूट गया और 21 बच्चों ने अपनी जान दे दी। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष के सदस्यों को छात्रों का दर्द समझ में नहीं आता क्योंकि उनके बच्चे विदेशों में पढ रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार की विफलता के कारण बच्चों की जान चली गयी और प्रधानमंत्री ने एक शब्द भी नहीं बोला है।

तृणमूल सदस्य ने कहा कि जब सरकार छात्रों की बात नहीं सुनती तो उनके पास केवल प्रदर्शन का ही विकल्प रहता है लेकिन वहां उन्हें पुलिस कार्रवाई झेलनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री को सदन में आकर छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के बारे में जवाब देना चाहिए और यदि वह ऐसा नहीं करते हैं तो उन्हें इस्तीफा देना चाहिए। सदस्य ने कहा कि छात्रों को देशद्रोही घोषित नहीं किया जाना चाहिए और प्रदर्शनों को अपराध नहीं माना जाना चाहिए।

द्रमुक के तिरूचि शिवा ने केन्द्रीय कार्मिक , लोक शिकायत एवं पेंशन मामलों के मंत्री के यह विधेयक पेश किये जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि शिक्षा राज्य मंत्री इस विधेयक को पेश कर सकते थे। उन्होंने इस विधेयक को निर्थरक प्रयास बताते हुए कहा कि यह मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश है और इसका सकारात्मक परिणाम नहीं आयेगा। उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों से किये गये वादों को पूरा नहीं कर रही है।

श्री शिवा ने नीट परीक्षा पर सवाल उठाते हुए जोर देकर कहा कि इसे समाप्त किया जाना चाहिए। उन्होंने सत्ता पक्ष के इस दावे कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर पेलेट गन का इस्तेमाल नहीं किया गया, का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि यदि पेलेट गन से छात्र घायल नहीं हुए तो अस्पतालों में उनका उपचार किस चीज का हो रहा है। उन्होंने पूछा कि क्या गृह मंत्री ने जंतर मंतर जाकर छात्रों से बात की या सदन में आकर इस बारे में स्थिति स्पष्ट की।

भाजपा के ब्रजलाल ने कहा कि सरकार की नीयत साफ है और वह पेपर लीक की समस्या का समाधान करने के लिए पूरी तरह गंभीर है। इसे ध्यान में रखते विधेयक में पेपर लीक की समस्या से निपटने के लिए अनेक प्रावधान किये गये है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक से संबंधित मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा सख्त सजा और जुर्माने का भी प्रावधान है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक मामलों के निर्णयों के खिलाफ उच्च न्यायालयों में ही अपील की जा सकेगी।

भाजपा सदस्य ने जोर देकर कहा कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर पेलेट गन नहीं चलायी गयी। उन्होंने अनेक मौकों का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस सरकारों के दौरान प्रर्शनकारियों पर अनेक बार गोलियां चलायी गयी। इसके लिए उन्होंने संसद के सामने साधु संतों के 1966 के प्रदर्शन का मुख्य रूप से उल्लेख किया और कहा कि इसमें साधु संत और गौमाता समर्थकों पर गोलियां चलायी गयी। समाजवादी पार्टी के इस आरोप कि सरकार की नीयत साफ नहीं है पर भाजपा सदस्य ने अनेक उदाहरण देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में नकल को समाजवादी पार्टी की सरकारों के दौरान संस्थागत रूप दिया गया।

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