नयी दिल्ली , मार्च 27 -- अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल को देखते हुए सरकार ने शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में 10-10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की घोषणा की।
यह कटौती तत्काल प्रभाव से लागू हो गयी है। सरकार के इस निर्णय से तेल विपणन कंपनियों पर दबाव कम होगा और उन्हें फिलहाल पेट्रोल डीजल के दाम नहीं बढ़ाने होंगे।
वित्त मंत्रालय ने आज जारी अधिसूचना में बताया कि पेट्रोल पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क 13 रुपये प्रति लीटर से घटाकर तीन रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 10 रुपये प्रति लीटर से घटाकर शून्य कर दिया गया है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में लिखा, "पश्चिम एशिया संकट के मद्देनजर घरेलू इस्तेमाल वाले पेट्रोल-डीजल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क में 10-10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की गयी है। इससे ग्राहकों को मूल्य वृद्धि से सुरक्षा मिलेगी।" उन्होंने बताया कि इसकी जानकारी संसद को भी दे दी है।
उल्लेखनीय है कि पश्चिम एशिया संकट के कारण अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में वृद्धि के कारण तेल विपणन कंपनियों पर दोनों जीवाश्म ईंधनों के दाम बढ़ाने का दबाव था। उत्पाद शुल्क में कटौती से उन्हें राहत मिलेगी।
अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मार्च का ब्रेंट क्रूड वायदा फिलहाल 0.5 प्रतिशत गिरकर करीब 107.5 डॉलर प्रति बैरल पर है। पश्चिम एशिया संकट के बाद से इसकी कीमत करीब 50 फीसदी बढ़ चुकी है।
यह कटौती सार्वजनिक तेल विपणन कंपनियों द्वारा नेपाल, भूटान, श्रीलंका और बांग्लादेश को किये जाने वाले निर्यात पर भी लागू होगी।
इसके अलावा, सरकार ने डीजल के निर्यात पर 21.5 रुपये और विमान ईंधन के निर्यात पर 29.5 प्रति लीटर का शुल्क लगाया है। वित्त मंत्री ने कहा कि इससे देश में डीजल और विमान ईंधन की ज्यादा उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी।
पेट्रोल डीजल के निर्यात पर विशेष उत्पाद शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है। निर्यातित पेट्रोल पर विशेष उत्पाद शुल्क शून्य है जबकि डीजल पर 18.5 रुपये प्रति लीटर है।
इस कटौती के बाद पेट्रोल पर मूल उत्पाद शुल्क 1.40 रुपये, विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क तीन रुपये, कृषि अवसंरचना एवं विकास उपकर 2.50 रुपये और अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (सड़क एवं अवसंरचना उपकर) पांच रुपये प्रति लीटर हो गया है।
डीजल पर मूल उत्पाद शुल्क 1.80 रुपये, विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क शून्य, कृषि अवसंरचना एवं विकास उपकर चार रुपये और विशेष उत्पाद शुल्क (सड़क एवं अवसंरचना) दो रुपये प्रति लीटर हो गयी है।
इन केंद्रीय करों के अलावा पेट्रोल-डीजल पर हर राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेश द्वारा अलग-अलग मूल्य वर्द्धित कर (वैट) भी लगाया जाता है।
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