कानपुर , फरवरी 15 -- पेंशनर्स फोरम की कार्यकारिणी की बैठक में शनिवार को सरकार के पास लंबे समय से लंबित पेंशनर्स की विभिन्न मांगों पर विस्तार से चर्चा की गई और शीघ्र निर्णय न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी गई।
फोरम के महामंत्री आनंद अवस्थी ने कहा कि पेंशनर्स से जुड़ी कई महत्वपूर्ण मांगें वर्षों से लंबित हैं, जिन पर सरकार को अंतिम निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि इन मांगों से लगभग दो करोड़ पेंशनर्स और उनके परिवार जुड़े हैं। प्रमुख मांगों में आठवें वेतन आयोग में पेंशनर्स को शामिल करना, 50 प्रतिशत महंगाई भत्ते को पेंशन/वेतन में जोड़ना, सभी पेंशनर्स को आयकर से मुक्त करना तथा ईपीएस-95 के तहत न्यूनतम 7,500 रुपये पेंशन और उस पर महंगाई भत्ता दिए जाने की मांग शामिल है।
बैठक में यह भी मांग की गई कि सभी वरिष्ठ नागरिकों को कोरोना काल से पूर्व रेलवे सहित अन्य सुविधाएं बहाल की जाएं तथा 65, 70, 75 और 80 वर्ष की आयु पर अतिरिक्त पेंशन बढ़ोतरी संबंधी प्रस्ताव को पुनः लागू किया जाए। इसके अलावा आईआईटी के सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भी सीजीएचएस की सुविधा देने, सभी सेवानिवृत्त कर्मचारियों को दो वर्ष में एक बार सहायक के साथ भारत भ्रमण की सुविधा प्रदान करने और कोरोना काल में रोके गए महंगाई राहत भत्ते का भुगतान करने की मांग रखी गई।
बैठक में सर्वश्री बी.एल. गुलाटी, सत्य नारायण, बी.पी. श्रीवास्तव, ए.के. निगम, जे.के. पांडेय, डी.पी. तिवारी, सुभाष भाटिया, डी.के. शुक्ल, आर.पी. मिश्रा, केशव चंद्र सिंह सहित बड़ी संख्या में पेंशनर्स उपस्थित रहे। फोरम ने स्पष्ट किया कि यदि मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलनात्मक कदम उठाए जाएंगे।
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