मुंबई , जनवरी 25 -- महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर उनके हालिया दावोस दौरे को लेकर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि वहां किए गए समझौते अधिकतर स्थानीय कंपनियों के साथ थे, जिसे उन्होंने जनता का मजाक बताया।

श्री चव्हाण ने दावोस दौरे के दौरान की गई घोषणाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या मुख्यमंत्री वैश्विक मंच पर घोषित समझौता ज्ञापनों के परिणामों का विवरण देते हुए एक श्वेत पत्र प्रस्तुत करेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि पिछले दावोस कार्यक्रमों के दौरान हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (एमओयू) के परिणामस्वरूप महाराष्ट्र में वास्तव में कितने बड़े विदेशी उद्योग स्थापित हुए हैं।

उन्होंने कहा कि दावोस दौरे की आलोचना अपने आप में उचित नहीं लग सकती है क्योंकि राज्य के विकास के लिए विदेशी निवेश आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अगर 30 लाख करोड़ रुपये के एमओयू वास्तव में हस्ताक्षरित हुए होते, तो यह निश्चित रूप से जश्न का विषय होता। उन्होंने सरकार पर हालांकि जमीनी स्तर पर उनके वास्तविक प्रभाव का खुलासा किए बिना बड़ी संख्या दिखाकर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया।

श्री चव्हाण के अनुसार सच्चाई आखिरकार सामने आती है और यह स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए कि पहले के दावोस एमओयू के तहत वादा किए गए कितने उद्योगों ने वास्तव में महाराष्ट्र में परिचालन शुरू किया है। उन्होंने आगे सवाल किया कि इन समझौतों के माध्यम से राज्य में कितना वास्तविक निवेश आया और कितनी नौकरियां वास्तव में सृजित हुईं।

पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने की बजाय राज्य में ही स्थित कंपनियों के साथ समझौते किए गए। उन्होंने कहा कि दावोस जैसे वैश्विक मंच पर अडानी और लोढ़ा जैसे घरेलू कॉरपोरेट समूहों के साथ एमओयू करना महाराष्ट्र के लोगों के साथ एक 'क्रूर मजाक' है।

श्री चव्हाण ने कहा कि राज्य के बेरोजगार युवाओं को औपचारिक कार्यक्रमों या सुर्खियां बटोरने वाली घोषणाओं की नहीं बल्कि पारदर्शिता, जवाबदेही और सार्थक रोजगार के अवसरों की जरूरत है। उन्होंने जोर दिया कि जनता का विश्वास बढ़ा-चढ़ाकर किए गए दावों की बजाय स्पष्ट खुलासों पर निर्भर करता है।

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