मुंबई , जुलाई 09 -- महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने गुरुवार को पुणे-मुंबई एक्सप्रेसवे 'मिसिंग लिंक' परियोजना को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सड़क ठेकों में बड़े पैमाने पर हो रहा भ्रष्टाचार राज्य में राजनीतिक अस्थिरता को बढ़ावा दे रहा है।
श्री चव्हाण ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा लगाए गए उन आरोपों को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर इस बुनियादी ढांचा परियोजना को रोकने का आरोप लगाया था।
श्री चव्हाण ने स्पष्ट करते हुए कहा, "'मिसिंग लिंक' परियोजना की परिकल्पना हमारे कार्यकाल के दौरान की गयी थी। दिसंबर 2013 में, मैंने केवल व्यापक सुरक्षा और तकनीकी जांच सुनिश्चित करने के लिए इस पर रोक लगाई थी, जिसमें 'विंड टनल' (हवा के दबाव की जांच) का अध्ययन भी शामिल था, क्योंकि उस समय भारत में इस तरह की सुरंग परियोजना का कोई उदाहरण नहीं था। मैं कभी भी इस परियोजना के प्रारूप के खिलाफ नहीं था।"कांग्रेस नेता ने संस्थागत भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए पूछा, "राजनीतिक उलटफेर और कथित 'पचास-पचास खोके' के लिए पैसा कहाँ से आता है? यह सड़क ठेकों और बिल्डर समूह से मिलने वाले कमीशन से पैदा होता है।"श्री चव्हाण ने एक्सप्रेसवे पर हाल ही में हुए गड्ढों के लिए राज्य सरकार के तकनीकी तर्कों पर भी सवाल उठाए। सरकार के इस दावे को खारिज करते हुए कि ये गड्ढे एक 'गुणवत्ता परीक्षण' का हिस्सा थे, उन्होंने कहा, "एक इंजीनियर के रूप में मुझे यह दावा बेतुका लगता है। गुणवत्ता परीक्षण सड़क की ऊपरी परत बिछाने से पहले किए जाते हैं, न कि परियोजना के पूरा होने और यातायात के लिए खोले जाने के बाद।"पूर्व मुख्यमंत्री ने महाराष्ट्र के 'समृद्धि महामार्ग' और उत्तर प्रदेश के एक्सप्रेसवे की लागत के बीच तुलना भी की। उन्होंने दावा किया कि समृद्धि गलियारे की प्रति-लेन-किलोमीटर लागत उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बनाई गई समान परियोजनाओं की तुलना में 35 से 40 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने संकल्प लिया कि भविष्य में उनकी पार्टी की सरकार आने पर इन खर्चों की नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) से जांच करायी जायेगी।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित