भुवनेश्वर , सितंबर 17 -- उड़ीसा उच्च न्यायालय ने 1962 के भारत-चीन युद्ध लड़ने वाले सेना के पूर्व सैनिक की विधवा को चार दशक से अधिक समय पहले उसके दिवंगत पति को आवंटित भूमि के बंदोबस्त के लिए बारंगा तहसीलदार के समक्ष नए सिरे से अभ्यावेदन दाखिल करने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति संजीव पाणिग्रही और न्यायमूर्ति मुराहरी श्री रमन की खंडपीठ ने बुधवार को खुर्शिदा बेगम की ओर से दायर रिट याचिका का निस्तारण करते हुए यह आदेश दिया। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि उनके दिवंगत पति अबू सैयद हारून खुर्शिद ने 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान तथा जम्मू और श्रीनगर के दुर्गम क्षेत्रों में सेना में सेवा की थी। भूमिहीन होने के कारण उन्होंने वर्ष 1976 में भूमि आवंटन के लिए कटक के कलेक्टर के समक्ष आवेदन किया था।
राजस्व निरीक्षक के निरीक्षण के बाद कटक सदर के तहसीलदार ने 23 अगस्त 1980 को उनके पक्ष में विद्याधरपुर में 0.08 एकड़ भूमि के निपटारे का आदेश दिया था। बाद में 1989 में भूमि याचिकाकर्ता के नाम पर अधिकार अभिलेख में दर्ज कर दी गयी।
कटक के अतिरिक्त जिलाधिकारी ने बाद में भूमि निपटारे के आदेश को रद्द कर दिया और अधिकार अभिलेख भी निरस्त कर दिया। उन्होंने कहा कि मूल आवेदन तुलसीपुर की भूमि से संबंधित था, जबकि भूमि बारंगा में आवंटित की गयी थी।
पति की वर्ष 2016 में मृत्यु के बाद बेगम ने अगस्त 2023 में भूमि के निपटारे के लिए जिलाधिकारी के समक्ष आवेदन किया। मामला तहसीलदार को भेजा गया, जिन्होंने उन्हें बताया कि आवंटित भूखंड कटक सदर के बजाय बारंगा तहसील के अंतर्गत आता है।
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