कोलकाता , फरवरी 23 -- पूर्व रेल मंत्री और तृणमूल कांग्रेस के दिवंगत नेता मुकुल रॉय का पार्थिव शरीर सोमवार की शाम उत्तर 24 परगना जिले के हलिसहर श्मशान घाट में पंचतत्व में विलीन हो गया।
श्री रॉय के अंतिम संस्कार के मौके पर पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी सहित तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
इकहत्तर वर्षीय श्री रॉय का रविवार देर रात एक निजी अस्पताल में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। वह लंबे समय से किडनी संबंधी जटिलताओं सहित कई बीमारियों का इलाज करा रहे थे और इसी दौरान कोमा में चले गये थे। उनके पार्थिव शरीर को पश्चिम बंगाल विधानसभा और कांचरापाड़ा स्थित उनके आवास पर ले जाया गया।
अपनी चतुराई और राजनीतिक पैंतरेबाजी के लिए कभी 'बंगाल की राजनीति का चाणक्य' कहे जाने वाले श्री रॉय विधुर थे। उनके परिवार में उनका बेटा और पश्चिम बंगाल के पूर्व विधायक सुभ्रांशु रॉय हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्री रॉय के परिवार और समर्थकों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की।
प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा, "पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री मुकुल रॉय जी के निधन से दुख हुआ। उन्हें उनके राजनीतिक अनुभव और समाज की सेवा के प्रयासों के लिए याद किया जायेगा। उनके परिवार और समर्थकों के प्रति संवेदनाएं। ओम शांति।"श्री रॉय का राष्ट्रीय और राज्य की राजनीति में एक लंबा और उतार-चढ़ाव भरा करियर रहा। वर्षों तक, उन्होंने महत्वपूर्ण संगठनात्मक और मंत्रिस्तरीय जिम्मेदारियां संभालीं और उन्हें पार्टी हलकों में एक मंझे हुए रणनीतिकार के रूप में माना जाता था।
तृणमूल कांग्रेस के शासन के पहले पांच वर्षों (2011 से 2016) के दौरान उन्होंने विभिन्न दलों से तृणमूल कांग्रेस में दलबदल कराने में केंद्रीय भूमिका निभायी थी।
तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष एवं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने पुराने करीबी सहयोगी श्री रॉय के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया।
सुश्री बनर्जी ने 'एक्स' पर लिखा, "दिग्गज राजनीतिज्ञ और राजनीतिक आंदोलनों में मेरे पुराने सहयोगी रहे श्री मुकुल रॉय के निधन की खबर से स्तब्ध हूं। वह केंद्रीय मंत्री थे और कार्यकर्ताओं के बीच उनकी स्वीकार्यता थी।"श्री रॉय की संगठनात्मक क्षमता को श्रद्धांजलि देते हुए सुश्री बनर्जी ने याद किया कि उन्होंने तृणमूल छोड़ दी थी, लेकिन बाद में वह फिर से इसमें शामिल हो गये थे।
श्री अभिषेक बनर्जी ने श्री रॉय के निधन को बंगाल के राजनीतिक इतिहास के एक युग का अंत बताया और कहा , "अपार अनुभव वाले एक दिग्गज नेता, उनके योगदान ने राज्य की सार्वजनिक और राजनीतिक यात्रा के एक महत्वपूर्ण चरण को आकार देने में मदद की।"उन्होंने कहा, "अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के संस्थापक स्तंभ के रूप में, उन्होंने संगठन के शुरुआती वर्षों के दौरान इसके विस्तार और सुदृढ़ीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी।" श्री रॉय ने मार्च से सितंबर 2012 तक केंद्रीय रेल मंत्री के रूप में कार्य किया, इससे पहले वह प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मंत्रिमंडल में जहाजरानी राज्य मंत्री थे।
राजनीति के अपने शुरुआती वर्षों में श्री रॉय कांग्रेस नेता सोमेन मित्रा के करीबी सहयोगी थे। बाद में उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी थी और वह तृणमूल कांग्रेस के संस्थापकों में शामिल हो गये। इसके बाद तृणमूल छोड़ कर 2021 में कृष्णानगर उत्तर सीट से भाजपा के टिकट पर विधायक बने। मगर ज्यादा दिन तक वहां नहीं रहे, फिर से तृणमूल में लौट आये, लेकिन खराब स्वास्थ्य के कारण पार्टी के कार्यक्रमों में भाग नहीं ले सके।
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