दुर्ग , जुलाई 22 -- छत्तीसगढ़ में दुर्ग के न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (जेएमएफसी) न्यायालय ने पूर्व क्रिकेटर राजेश चौहान के खिलाफ कथित धोखाधड़ी के मामले में मोहन नगर थाना पुलिस को प्राथमिकी दर्ज कर जांच करने के निर्देश दिए हैं। आरोप है कि उन्होंने जिंदल इस्पात लिमिटेड में ट्रांसपोर्ट का काम दिलाने का झांसा देकर एक ठेकेदार से 17.52 लाख रुपये की कथित ठगी की।

याचिकाकर्ता दिनकर विश्वमित्र के अनुसार उनकी मुलाकात मित्र सरोज कुमार के माध्यम से राजेश चौहान से हुई थी। बातचीत के दौरान राजेश चौहान ने स्वयं को पूर्व भारतीय क्रिकेटर बताते हुए कहा कि उनके उद्योगपति नवीन जिंदल से करीबी संबंध हैं। उन्होंने दावा किया कि उनकी गोविंद ट्रांसपोर्ट कंपनी को ओडिशा के क्योंझर स्थित जिंदल इस्पात लिमिटेड में आयरन और अन्य सामग्री के परिवहन का बड़ा ठेका मिला है तथा साझेदारी में ट्रक लगाने पर अच्छा मुनाफा होगा।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि विश्वास कायम करने के लिए राजेश चौहान ने जिंदल इस्पात से संबंधित कथित वर्क ऑर्डर भी दिखाया और ट्रांसपोर्ट व्यवसाय में साझेदारी का प्रस्ताव दिया। बाद में जांच में यह दस्तावेज पूरी तरह फर्जी होने की बात सामने आई।

दिनकर विश्वमित्र का कहना है कि उन्होंने मामले की शिकायत पुलिस से की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होने पर उन्हें न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। मामले की सुनवाई के बाद जेएमएफसी अदालत ने मोहन नगर थाना पुलिस को प्रकरण दर्ज कर विधिसम्मत जांच करने का आदेश दिया।

उल्लेखनीय है कि वर्तमान में राजेश चौहान व्यवसायी होने के साथ ही एक क्रिकेट अकादमी का संचालन भी करते हैं।

पुलिस ने आज बताया कि,मामले में न्यायालय के आदेश के बाद पुलिस आगे की जांच करेगी।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित