नयी दिल्ली , अप्रैल 26 -- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि बांस की परिभाषा बदलने से पूर्वोत्तर में बड़ा बदलाव आया है और यह क्षेत्र तेजी से फल फूल रहा है।

श्री मोदी ने अपने मासिक कार्यक्रम मन की बात में रविवार को कहा," पूर्वोत्तर हम सब के लिए अष्टलक्ष्मी है। यहां भरपूर प्रतिभा है और पूर्वोत्तर की प्राकृतिक सुंदरता भी सबका ध्यान खींचती है। 'मन की बात' में भी हम अक्सर पूर्वोत्तर के लोगों की उपलब्धियों पर चर्चा करते आए हैं। आज ऐसी ही एक और उपलब्धि बांस सेक्टर में पूर्वोत्तर की सफलता। जिस चीज को कभी बोझ के रूप में देखा जाता था, वह आज रोजगार, कारोबार और नवाचार को नई गति दे रही है। हमारी माताएं-बहनें इसकी सबसे बड़ी लाभार्थी हैं। आपको ये जानकर हैरानी होगी कि बांस की परिभाषा बदल देने से कितना बड़ा परिवर्तन आया है। अंग्रेजों के बनाए कानून के हिसाब से बांस को पेड़ के रूप में परिभाषित किया गया था और इससे जुड़े नियम बहुत कड़े थे। कहीं पर भी बांस को ले जाना बहुत मुश्किल था। ऐसे में यहां के लोग बांस से जुड़े काम-धंधे से दूर होते गए। साल 2017 में कानून में बदलाव करके हमने बांस को पेड़ की श्रेणी से बाहर किया। जिसके नतीजे सबके सामने हैं। आज पूरे पूर्वोत्तर में बांस सेक्टर फल-फूल रहा है।"उन्होंने कहा,"त्रिपुरा के गोमती जिले के बिजॉय सूत्रधार और दक्षिण त्रिपुरा के प्रदीप चक्रवर्ती की बात करें। इन्होंने नए कानूनों को अपने लिए एक बड़े अवसर के रूप में देखा। फिर इन्होंने अपने काम को तकनीक से जोड़ा। आज वे पहले से कहीं बेहतर और कहीं ज्यादा बांस के उत्पाद बना रहे हैं। नागालैंड के दीमापुर और आसपास के इलाकों में कई ऐसे स्वयं सहायता समूह हैं जिन्होंने बांस से जुड़े खाद्य उत्पाद में वैल्यू एडिशन किया है। वहां खोरोलो क्रिएटिव क्राफ्ट जैसी टीमें भी हैं, जो, बांस के फर्नीचर और हैंडीक्राफ्ट पर काम कर रही हैं ।

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