भुवनेश्वर , जुलाई 21 -- ओडिशा के पुलिस महानिदेशक वाई.बी. खुराना ने मंगलवार को पूर्वी राज्यों के बीच एक ऐसे पुलिसिंग प्रणाली की मांग की जो आपसी तालमेल, टेक्नोलॉजी और खुफिया जानकारी पर आधारित हो।
श्री खुराना ने भुवनेश्वर में पूर्वी क्षेत्रीय पुलिस समन्वय समिति (इआरपीसीसी) की उच्च-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि इस प्रणाली का मकसद संगठित अपराध, साइबर अपराध, नशीले पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी, वामपंथी उग्रवाद और सुरक्षा से जुड़ी अन्य नयी चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करना है, जो राज्य की सीमाओं से परे फैली हुई हैं। कोई भी राज्य अकेले इन उभरते खतरों से प्रभावी ढंग से नहीं निपट सकता।
उन्होंने लगातार खुफिया जानकारी साझा करने, सूचनाओं के निर्बाध आदान-प्रदान, आधुनिक टेक्नोलॉजी को अपनाने और राज्यों के बीच करीबी सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया ताकि अपराधियों और उग्रवादियों के तेजी से जटिल होते नेटवर्क का मुकाबला किया जा सके।
गृह मंत्रालय के तत्वावधान में आयोजित इस बैठक का उद्देश्य संगठित अपराध, वामपंथी उग्रवाद और सुरक्षा से जुड़ी अन्य नयी चुनौतियों का सामना करने के लिए राज्यों के बीच आपसी तालमेल को मजबूत करना था।
बैठक में बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड और छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशकों के साथ-साथ केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ), केंद्रीय पुलिस संगठनों (सीपीओ) के वरिष्ठ अधिकारियों और भाग लेने वाले राज्यों के पुलिस अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
समिति ने सर्वसम्मति से नियमित समन्वय बैठकें आयोजित करने का संकल्प लिया ताकि प्रगति की समीक्षा की जा सके, बेहतरीन तौर-तरीके साझा किये जा सकें, सुरक्षा से जुड़ी नयी चिंताओं का समाधान किया जा सके और राज्यों तथा केंद्रीय एजेंसियों के बीच ऑपरेशनल तालमेल को और मजबूत किया जा सके।
प्रतिभागियों ने अंतर-राज्यीय अपराधी नेटवर्क के खिलाफ संयुक्त अभियानों को तेज करने, सीमावर्ती इलाकों में पुलिसिंग व्यवस्था को बेहतर बनाने और टेक्नोलॉजी-आधारित एवं खुफिया जानकारी पर आधारित पुलिसिंग को बढ़ावा देने के उपायों पर भी चर्चा की।
डीजीपी ने प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए क्षेत्रीय समन्वय मंच की मेजबानी की जिम्मेदारी ओडिशा पुलिस को सौंपने के लिए गृह मंत्रालय का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के सहयोगी मंच ऑपरेशनल तालमेल बढ़ाने, आपसी विश्वास को बढ़ावा देने और देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
दिन भर चली चर्चाओं में कई रणनीतिक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिनमें आत्मसमर्पण करने वाले वामपंथी उग्रवादियों की निगरानी और पुनर्वास, अंतर-राज्यीय नशीले पदार्थों की तस्करी पर रोक लगाने के लिए समन्वित रणनीतियां बनाना, रियल-टाइम खुफिया जानकारी साझा करके साइबर अपराध से निपटने के लिए सहयोग मजबूत करना, जीरो एफआईआर के स्थानातंरण और समयबद्ध जांच में तेजी लाना, रेलवे सुरक्षा बढ़ाना और अवैध घुसपैठ से निपटने के लिए एक एकीकृत रणनीति तैयार करना शामिल है।
श्री खुरानिया ने बैठक के समापन पर भरोसा जताया कि चर्चाओं से निकले फैसले और सुझाव राज्यों के बीच सहयोग को काफी मजबूत करेंगे, कानून लागू करने की क्षमताओं को बढ़ाएंगे, राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करेंगे और पूर्वी भारत में सुरक्षा से जुड़ी जटिल चुनौतियों से निपटने के लिए एक मजबूत ढांचा प्रदान करेंगे।
बैठक में ओडिशा के डीजीपी (सीआईडी-अपराध शाखा) विनयतोष मिश्रा, खुफिया निदेशक आर.पी. कोचे, एडीपीजी (एएनओ) संजीव पांडा, एडीजीपी (रेलवे और तटीय सुरक्षा) अरुण बोथरा, एडीजीपी (मुख्यालय) प्रतीक मोहंती के अलावा भाग लेने वाले राज्यों, सीएपीएफ , सीपीओ और अन्य केंद्रीय एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।
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