मोतिहारी , अप्रैल 07 -- बिहार के पूर्वी चंपारण में चर्चित शराब कांड में सरकरी तंत्र से जुड़े चौकीदारों की संदिग्ध भूमिका ने इतने बड़े हादसे को अंजाम दिया।
इस मामले में जांच के आगे बढ़ने के साथ घटित जहरीली शराब कांड में पूर्वी चंपारण के दो चौकीदारों की संर्लिप्तता उभर कर सामने आयी है।
जांच एजेंसियां सक्रिय हुईं तो पता चला कि मेथनॉल की एक बड़ी खेप पिपराकोठी निवासी कन्हैया यादव ने मंगाई थी। कन्हैया ने इसे सुनील साह को उपलब्ध कराया और सुनील ने खलीफा नाम के व्यक्ति को इसकी आपूर्ति की। इसके बाद जहरीली शराब खलीफा के हाथों नाग राय और रूपेश जैसे खुदरा विक्रेताओं तक पहुंची। इस मामले में 04 अप्रैल को सुखारी साह नाम के व्यक्ति को तुरकौलिया थाना क्षेत्र के बैरिया बाजार में वही शराब परोसी गयी, जिसके पीने से क्षेत्र में पहले ही मौत का सिलसिला शुरू हो गया था।
इस शराब के पीने से सुखारी जब बीमार हुआ तो जांच एजेंसियों को पता चला कि रघुनाथपुर थाना क्षेत्र के चौकीदार सुरेश यादव के भाई रूपेश यादव ने उसे यह शराब परोसी थी। इससे पहले तुरकौलिया थाना क्षेत्र के परसौना ग्राम के चौकीदार भरत राय के रिश्तेदार नागा राय की जहरीली शराब परोसने में संर्लिप्तता उजागर हुई थी। दोनों ही मामलों में मौत के इन कारोबारियों को अपने रिश्तेदार चौकीदारों का संरक्षण प्राप्त था। पुलिस ने चौकीदार भरत राय को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया हैं। सच्चाई यह है कि सरकार की ओर से लागू शराबबंदी इस इलाके में उसी के तंत्र में शामिल चौकीदारों की मिलीभगत से विफल हो गई।
उल्लेखनीय है कि पूर्वी चंपारण में 01 अप्रैल की संध्या से जहरीली शराब से प्रभावित हो कर मरने वालो का सिलसिला शुरू हुआ था और अब तक दो दर्जन लोग काल के गाल में प्रवेश कर चुके हैं तथा 16 लोग अभी भी जीवन और मौत से संघर्ष रहे हैं। इनमें ऐसे कई लोग हैं, जिन्हें अपनी आँखों की खोई हुई रौशनी के लौटने का इंतजार है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित