मोतिहारी , जुलाई 06 -- बिहार में पूर्वी चंपारण जिले की एक अदालत ने चार महिलाओं पर तेजाब फेंककर गंभीर रूप से घायल करने के 12 वर्ष पुराने मामले में दोषी करार दिए गए एक अभियुक्त को आजीवन कारावास तथा दो लाख 17 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अदालत ने जुर्माना नहीं देने की स्थिति में एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतने का भी आदेश दिया है। साथ ही पीड़िता को बिहार पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत मुआवजा उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया गया है।21वीं अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रमेश रंजन की अदालत ने यह फैसला सुनाते हुए घोड़ासहन थाना क्षेत्र के जगीरहां कोठी निवासी विजय कुमार यादव को भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं में दोषी ठहराया।
अदालत ने अपने आदेश में मुख्य पीड़िता को बिहार पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत पीड़ित घोषित करते हुए मुआवजा प्रदान करने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकार को आदेश की प्रति भेजी है। साथ ही जिला प्रतिकर समिति को भी आवश्यक कार्रवाई के लिए सूचित किया गया है।
अभियोजन के अनुसार, घोड़ासहन थाना कांड संख्या 56/2014 में स्थानीय निवासी रेणु देवी ने अपने भसुर विजय कुमार यादव, उसकी पत्नी रेखा देवी, ससुर रामविश्वास राय तथा साले अजय कुमार यादव के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई थी। प्राथमिकी में आरोप लगाया गया था कि 9 फरवरी 2014 की दोपहर आरोपित हत्या की नीयत से उसके घर पहुंचे और रस्सी से गला घोंटने का प्रयास किया। शोर सुनकर बचाने पहुंचीं उसकी गोतनी संगीता देवी, वर्षा कुमारी और रिमझिम कुमारी के साथ भी मारपीट की गई।इसके बाद आरोपितों ने कथित रूप से तेजाब फेंक दिया, जिससे चारों महिलाएं गंभीर रूप से झुलस गईं।
घटना के बाद ग्रामीणों ने सभी घायलों को घोड़ासहन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां से उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए सदर अस्पताल मोतिहारी रेफर किया गया। बाद में बेहतर इलाज के लिए सभी को पीएमसीएच, पटना भेजा गया, जहां उनका लंबे समय तक उपचार चला।
शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया था कि उसकी कोई संतान नहीं है और आरोपित उसकी हत्या कर संपत्ति पर कब्जा करना चाहते थे। इसी उद्देश्य से इस वारदात को अंजाम दिया गया। पुलिस ने जांच पूरी कर चारों आरोपितों के विरुद्ध आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया। हालांकि अन्य तीन आरोपितों के मामलों की सुनवाई अलग-अलग चल रही है।
सत्रवाद संख्या 565/2014 की सुनवाई के दौरान अपर लोक अभियोजक मो. मोइनुल हक एवं उनके सहायक अधिवक्ता पंकज कुमार ने अभियोजन की ओर से 13 गवाहों की गवाही कराई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद अदालत ने विजय कुमार यादव को भारतीय दंड संहिता की धारा 326, 307, 120-बी, 353(3), 323, 342, 341/34 के तहत दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई।
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