मोतिहारी , अप्रैल 29 -- बिहार में पूर्वी चंपारण जिले की अदालत ने बुधवार को बहुचर्चित शंकर ढाबा गोलीकांड मामले में दोषी को 10 साल की सजा सुनाई है।
द्वितीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश विद्या प्रसाद की अदालत ने आरोपी राजतिलक उर्फ सुमित सिंह को दोषी करार देते हुए 10 वर्ष के सश्रम कारावास और 18 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
यह माला 27 मार्च 2019 का है। तुरकौलिया थाना क्षेत्र के बेलवाराय निवासी सूचक अभिनव कुमार सिंह उर्फ मिंटू सिंह अपने साथियों के साथ एनएच-28 स्थित चैलाहा शंकर ढाबा पर चाय पी रहे थे। इसी दौरान आरोपी राजतिलक उर्फ सुमित सिंह का फोन आया और मिलने की बात कही। कुछ देर बाद वह ढाबे पर पहुंचा, चाय पी और फिर किसी को फोन कर बुलाया। लगभग 15 मिनट बाद बाइक सवार दो अज्ञात बदमाश मौके पर पहुंचे और ढाबे में घुसकर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। सूचक के अनुसार, इसी दौरान आरोपी ने भी पिस्तौल से गोली चलाई, जिससे उसे पेट और हाथ में गोली लग गई। गंभीर हालत में उसे तुरंत शहर के एक नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज हुआ।
मामले की सुनवाई के दौरान अपर लोक अभियोजक प्रभाष त्रिपाठी ने सात गवाहों की गवाही अदालत में पेश की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं और आर्म्स एक्ट के तहत दोषी पाया और 10 वर्ष के सश्रम कारावास और 18 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यदि आरोपी अर्थदंड की राशि जमा नहीं करता है, तो उसे अतिरिक्त चार माह की सजा भुगतनी होगी।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित