, Jan. 12 -- मोतिहारी, 12 जनवरी (वार्ता बिहार में बन रही चमचमाती खुबसूरत सड़कों को देख कर फक्र होता है, लेकिन यातायत नियमों की अनदेखी और बेलागाम रफ्तार से पूर्वी चंपारण जिले की सड़कों पर अक्सर मौत पसरी दिखती है।

हालात ये हैं कि जिले में हर 43 घण्टें में कम से कम एक सड़क दुर्घटना में किसी न किसी की मौत हो जाती है। पिछले 25 दिनों की कहानी भी मिलती जुलती है और ऐसी दुर्घटनाओं में मौत का आंकड़ा 14 तक पहुंच चुका है।

ऐसी ही एक दुर्घटना गुजरे रविवार की देर रात पकड़ीदयाल थाना क्षेत्र के चैता गांव में घटित हुई है, जिसमें ट्रैक्टर के नीचे दबकर दो युवकों की मौत हो गई है। जबकि एक व्यक्ति घायल हो गया है। तीनों ईंट गिराकर वापस लौट रहे थे। इसी दौरान रफ्तार से संतुलन खोकर ट्रैक्टर पलट गया, जिसमें तीनों मजदूर दब गए। इसके बाद आस-पास के लोग मौके पर पहुंचे। एक को सुरक्षित निकालने में कामयाब भी हुए, जबकि दो ट्रैक्टर के नीचे ही दबे रह गए और उनकी मौत घटना स्थल पर ही हो गयी। मृतकों की पहचान अभिषेक और कुंदन के रूप में हुई है। दोनों चैता गांव के निवासी हैं।

पूर्वी चंपारण में वाहनों की अनियंत्रित रफ़्तार जिंदगियां छीन रहा है। वर्ष 2025 के आखिरी महीने के महज अंतिम 13 दिनों में नौ लोगों की जान सड़क दुर्घटनाओं में चली गयी। नववर्ष 2026 में यह गति थोड़ी कम हुई है फिर भी 12 दिनों में पांच लोगों ने इन सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवा है। सरकारी फाइलों में हर मौत महज आंकड़ा होती है लेकिन सत्य तो यह है कि बेलगाम हुई रफ़्तार हर दूसरे दिन किसी न किसी परिवार की गृहस्थी उजाड़ रही है। इन दुर्घटनाओं में किसी न किसी का सुहाग मिटता है और किसी न किसी परिवार का सहारा छीन जाता है।

रविवार की देर रात हुई सड़क दुर्घटना में मरने वाले अभिषेक और कुंदन युवा थे। भले अभी दोनों की शादियां नहीं हुईं थीं लेकिन दोनों के परिवार इनकी ही मजदूरी से चला करते थे। इन दोनों की मौत के साथ ही परिवार के हर सपनों की भी मौत हो गयी है।

इस तरह की मौतें संदेश दे रही हैं कि जिस गति से सडकों की चमचमाहट बढ़ रही है, उसी गति से चालक यातायात नियमों की अनदेखी करने से बाज नही आ रहे हैं और आवश्यक कहा कि सरकार चालकों कि दक्षता, नियमों के पालन और सडक पर दुर्घटना सूचक चिन्हों और संदेशों का कड़ाई से पालन करे।

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