मोतिहारी , जून 11 -- बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, मोतिहारी ने सेवा में त्रुटि और अनुचित व्यापारिक व्यवहार के एक मामले में अंबिका नगर, चिलवनिया स्थित सदगुरू एंटरप्राइजेज के प्रोपराइटर अमित कुमार पाण्डेय को उपभोक्ता के पक्ष में 1.90 लाख रुपये का परितोष भुगतान करने का आदेश दिया है। आयोग ने निर्देश दिया कि आदेश की तिथि से दो माह के भीतर राशि का भुगतान किया जाए, अन्यथा एक मई 2025 से भुगतान की तिथि तक सात प्रतिशत साधारण ब्याज भी देय होगा।
आयोग में तुरकौलिया थाना क्षेत्र के शंकर सरैया बनकट निवासी राजेश कुमार चौधरी द्वारा दायर परिवाद में कहा गया था कि उन्होंने 31 जनवरी 2024 को सदगुरू एंटरप्राइजेज से 1.70 लाख रुपये में एक ई-रिक्शा खरीदा था। इसके अतिरिक्त कागजात तैयार कराने के नाम पर 10 हजार रुपये भी लिए गए थे। विक्रेता ने वाहन का बीमा कराने, बैट्री पर एक वर्ष की गारंटी देने तथा पूर्ण चार्ज पर 150 किलोमीटर तक चलने का आश्वासन दिया था।
परिवादी के अनुसार, खरीद के बाद ई-रिक्शा की बैट्री मात्र 90 किलोमीटर तक ही चल पाती थी तथा वाहन में बार-बार तकनीकी खराबियां आने लगीं। मरम्मत के नाम पर एजेंसी कई-कई सप्ताह तक वाहन अपने पास रखती रही। साथ ही आवश्यक दस्तावेज जिला परिवहन कार्यालय में जमा नहीं किए जाने के कारण वाहन का न तो निबंधन हो सका और न ही बीमा कराया गया।
परिवाद में यह भी आरोप लगाया गया कि मरम्मत के लिए लिया गया ई-रिक्शा लंबे समय तक एजेंसी के कब्जे में रखा गया और बाद में एजेंसी ने दूसरे ब्रांड के नाम से नया कारोबार शुरू कर दिया। कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं होने पर उपभोक्ता ने आयोग की शरण ली।
मामले की सुनवाई के दौरान आयोग के अध्यक्ष गिरीश मिश्रा एवं सदस्य संजीव कुमार ने दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किया। आयोग ने विक्रेता की ओर से सेवा में स्पष्ट कमी पाते हुए परिवादी के पक्ष में फैसला सुनाया।
आयोग ने ई-रिक्शा की कीमत एवं निबंधन शुल्क के मद में 1.80 लाख रुपये तथा शारीरिक-मानसिक कष्ट और वाद व्यय के लिए 10 हजार रुपये, कुल 1.90 लाख रुपये भुगतान करने का आदेश दिया।
उपभोक्ता अधिकारों की दृष्टि से इस निर्णय को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आयोग के फैसले से यह संदेश गया है कि उपभोक्ताओं से किए गए वादों का पालन करना व्यवसायियों की कानूनी जिम्मेदारी है और सेवा में लापरवाही बरतने पर उन्हें जवाबदेह ठहराया जा सकता है।
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