मोतिहारी , मई 20 -- बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में पुलिस ने एक सरकारी विद्यालय के प्रधानाध्यापक तथा एक सहायक शिक्षिका को फर्जी अंकपत्र और ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी) जारी कर एक अपराधी की मदद करने के लिए गिरफ्तार किया है।
दोनों शिक्षकों सुबोध कुमार पाठक और रिभा कुमारी के ऊपर आरोप है कि उन्होंने अपराधियों को कोर्ट से जमानत दिलाने के लिए फर्जी अंकपत्र और टीसी बनाकर उनकी उम्र कम दिखायी, जिसकी मदद से उन्हें कागजों पर नाबालिग साबित किया जा सके।
पुलिस सूत्रों ने आज बताया कि मामला चिरैया प्रखंड स्थित राजकीय उत्क्रमित माध्यमिक विद्यालय, परेवा से जुड़ा है। वर्ष 2022 में लड़की के अपहरण और बाइक चोरी के मामले में परेवा गांव निवासी भोला कुमार उर्फ भोला साह जेल में बंद था। उसे किशोर साबित कर जमानत दिलाने के उद्देश्य से स्कूल से फर्जी प्रमाण पत्र जारी किया गया, जिसमें उसकी जन्मतिथि 15 मई 2006 दर्ज की गई थी।
सूत्रों ने बताया कि आरोपी को किशोर बताते हुए किशोर न्याय परिषद के समक्ष शपथ पत्र और स्कूल का नामांकन रजिस्टर प्रस्तुत किया गया। दस्तावेजों की जांच के दौरान परिषद को संदेह हुआ। गहन जांच में पाया गया कि स्कूल का नामांकन रजिस्टर वर्ष 2014 में ही लाल स्याही से बंद किया जा चुका था, लेकिन उसके अंतिम हिस्से में स्याही बदलकर पुरानी तारीख़ में तीन नए नाम दर्ज किए गए थे, जिनमें भोला कुमार का नाम भी शामिल था।
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